Category "Lotpot Personality"

18Jan2023

भारत की एक और बेटी, कैप्टन शिवा चौहान अपनी मेहनत और हिम्मत के बल पर आसमान की बुलंदी छू रही है। शिवा वो प्रथम महिला सैन्य अधिकारी है जो सियाचिन की कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने के लिए तैनात है। उन्होंने सियाचिन बैटल स्कूल में, ऑफिसर्स तथा इंडियन आर्मी के पुरुषों के साथ ट्रेनिंग ली।

24Nov2022

सोते हुए सपने देखने से, सपने पूरे नहीं होते , हमें जागते हुए सपने देखना चाहिए। ऐसे ही एक बच्चा था जो जागकर सपना देखता था। नाम था उसका, कोनोसुके मात्सुशिता , जिसका जन्म 1894 में जापान के वाकायमा प्रांत में एक अच्छे घराने में हुआ था।

18Oct2022

आज जहां युवा और बच्चे थोड़ी सी मेहनत करके थक हार जाते हैं वहीं हमारे देश की एक पीढ़ी अभी भी ऐसी है जो युवाओं को भी अपनी चुस्ती स्फूर्ति से पछाड़ सकते हैं। हम बात कर रहे हैं दिल्ली के नजफगढ देहात के मालिकपुर की रहने वाली 94 वर्ष की दादी  भगवानी देवी डागर की जो अपनी सारी तकलीफ़ों को दूर भगाकर ऐसे ऐसे पॉसिटिव कार्य कर रही है जिससे उनके गांव का ही नहीं बल्कि देश का नाम रोशन हो रहा है।

11Oct2022

सशस्त्र बलों को प्रदान की जाने वाली सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है परमवीर चक्र। भारत के स्वतंत्र होने से लेकर आज तक केवल इक्कीस वीरता पुरस्कार प्रदान की गई जिसमें से चौदह वीरों को मरणोपरांत परमवीर चक्र प्राप्त हुआ। लेकिन, भारतीय वायुसेना को अब तक सिर्फ एक परमवीर चक्र प्राप्त हुआ जो 1971 के युद्ध में फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों को उनके वीरगति प्राप्त होने के पश्चात दिया गया।

2Oct2022

भारत के द्वितीय प्रधान मंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री उन चंद लोगों में से गिने जाते हैं जो बेहद साधारण परिवार से होने के बावजूद देश के प्रधानमंत्री बने। उनका जन्मदिन दो अक्टूबर, महात्मा गांधी जी के साथ मनाया जाता है। दो अक्तूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्में लाल बहादुर शास्त्री, साधारण, कद काठी के होने के बावजूद, अपनी सरलता, सच्चाई, जीवन की श्रेष्ठता, उच्च विचार, हर धर्म, हर वर्ग और हर भाषा के प्रति सम्मान तथा प्यार के कारण सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में मानवता के प्रतीक माने जाते हैं हैं। उनके द्वारा दिया गया नारा ‘जय जवान, जय किसान’ भारत की उन्नति का सशक्त मशाल बनकर विश्व भर में प्रसिद्ध हुआ और देश भक्ति का प्रतीक बन गया।

1Oct2022

भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है, स्कूल कॉलेज में भी गांधी जी के बारे में बहुत कुछ पढ़ाया गया है।

आइए जानते हैं बापूजी की कुछ सुनी अनसुनी बातें

गांधीजी को अहिंसा का पुजारी माना जाता है। उन्होंने अपने अहिंसा आंदोलन से देश को अंग्रेज़ो से आज़ाद किया था। दरअसल जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में थोड़े समय के लिए रहे थे तब उन्होंने 1899 के एंग्लो बोइर युद्व  की भयानक त्रासदी देखी थी, उसका उनपर इतना असर पड़ा कि उन्होंने अहिंसा के रास्ते पर खुद चलने और सबको अहिंसा का रास्ता दिखाने का निश्चय कर लिया था।

गाँधी जी समय के बड़े पाबंद थे। वे अपने अगले दिन के कार्यक्रमों का टाइम टेबल पहले ही बना लेते और उसी के अनुसार चलते थे। अगर किसी की घड़ी पाँच मिनट भी फास्ट या स्लो होता, वे उसे तुरंत घड़ी ठीक करने की सलाह देते। एक बार बापू जी किसी काम से महाराष्ट्र स्थित मिरज आए। वहां काम खत्म करके वे कहीं और जाना चाहते थे, लेकिन वहाँ के स्थानीय लोग चाहते थे कि वे कुछ दिन और उस गांव में रहे। इसलिए बहाना बनाया की गाड़ी खराब हो गई इसलिए उन्हें दो दिन और रुकना पड़ेगा। लेकिन गांधी जी नहीं माने और पैदल ही निकल पड़े। तब आखिर लोगों को उनके लिए गाड़ी लानी ही पड़ी। गांधीजी अपना सब सामान सही जगह पर बहुत सहेज कर रखते थे। लेकिन एक दिन उन्हें अपनी पेंसिल सही जगह नहीं मिली। उनकी चिंता और बेचैनी देख घरवालों ने कहा कि यह तो छोटी सी बात है, एक पेंसिल खरीद लाते है, लेकिन गांधीजी ने कहा कि बात पेंसिल की नहीं है, लापरवाही और व्यवस्था की कमी की है। जीवन व्यवस्थित होना ही चाहिए।

बापूजी को बेवजह खर्च करना बिल्कुल पसंद नहीं था, तन ढकने के लिए घुटने तक धोती, एक  खद्दर का गमछा, और दो वक्त का सादा थोड़ा सा भोजन के सिवाय वे अपने ऊपर एक पैसा भी ज्यादा खर्च नहीं करते थे। वे साफ़ सफाई पर बहुत ध्यान देते थे और अपने कपड़ों से लेकर घर और बाहर की सफाई भी खुद करना पसंद करते थे।

गांघी जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए सत्रह बार अनशन किया, उनका सबसे लंबा अनशन 21 दिन का था।

गांधीजी ने जो सिविल राइट्स का आंदोलन शुरू किया था वो चार महाद्वीपों के साथ साथ अन्य बारह देशों में भी पाला गया था। गांधीजी को स्पोर्ट्स में गहरी रुचि थी, उन्होंने प्रिटोरिया, जोहानसबर्ग और डरबन में भी तीन फुटबॉल क्लब शुरू किया था। गांधी जी को दुनिया के सभी देशों ने महान संत और शांति के पुजारी के रूप में स्वीकर किया। यहां तक कि गाँधी जी ने भारत को जिस ब्रिटेन से आज़ाद कराने के लिए अंग्रेजों के दांत खट्टे किए, उसी ब्रिटेन ने गांधीजी के सम्मान में, उनके निधन के इक्कीस वर्ष बाद, उनके नाम से डाक टिकट जारी किया और सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि गांधीजी जीवन भर अहिंसा के पुजारी रहे और उन्होंने सबको अहिंसा का रास्ता दिखाया, लेकिन उन्हें कभी शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला हालांकि पाँच बार वे इस नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेटेड जरूर किया गया।

★सुलेना मजुमदार अरोरा ★.

1Oct2022

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और देशभक्त वीर विनायक दामोदर सावरकर (Damodar Savarkar) उस क्रांतिकारी का नाम है जिनकी बुलन्द आवाज़ के आगे अंग्रेज सरकार तो क्या, भारत के भ्रष्ट राजनीतिक नेता भी थर थर कांपते थे। इस महान क्रांतिकारी का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र, नासिक के पास भागुर गांव में हुआ। उनके पिता थे दामोदर पंत सावरकर और माता राधा बाई ।

14Sep2022

दुनिया में बहुत से महान, ज्ञानी और गुणी लोगों के बारे में हम इतिहास में पढ़ चुके है लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके महान कर्मों की चर्चा जन जन तक नहीं पहुंच पाई है, आज हम उन्हीं महान इंसानों में से एक, गुरदेव सिंह खुश के बारे में जानकारी लेते है जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने प्रयासों से दुनिया की भूख मिटाई

29Jul2022

पिछले साल टोक्यो में ओलिंपिक गोल्ड जीतकर भारत का  पहला ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने नीरज चोपड़ा ( Neeraj Chopra) ने एक बार फिर 88.13 मीटर का बेस्ट थ्रो देकर वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीता।  खंड्रा पानीपत हरियाणा में 24 दिसंबर 1997 को जन्में  नीरज, बचपन में  थोड़ा मोटा था, जिसके कारण उनके दोस्त उन्हें चिढ़ाया करते थे, बेटे ने शिकायत की तो पापा ने नीरज को मदलौदा के जिम्नेजियम में दाखिला करवाया और बाद में उन्हे पानीपत के जिम में एनरोल किया ।

11Jul2022

महान गणितज्ञ, श्रीनिवास रामानुजन ( Srinivasa Ramanujan) को दुनिया में गणित का जादूगर क्यों कहा जाता है, आइए जानते है।  तमिलनाडु के एक छोटे से गांव इरोड के प्राथमिक शाला में एक दिन जब गणित की कक्षा चल रही थी तो शिक्षक ने बच्चों से कहा कि वो एक से लेकर सौ तक के अंक को जोड़ कर दिखाए। बच्चे इस सवाल का उत्तर ढूंढने में लग गए। लेकिन उन छोटे बच्चों के लिए यह इतना आसान नहीं था।