Category "Moral Stories"

5Nov2020

खिल्लू खरगोश शुरू से ही पढ़ाकू रहा है। उसके बारे में सबका विश्वास है कि होनहार खिल्लू अवश्य ही उनके जंगल का नाम रोशन करेगा। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने नज़दीकी शहर वाले काॅलेज में दाखिला ले लिया। उसकी इच्छा थी कि वह पढ़ लिखकर वैज्ञानिक बने।

5Nov2020

बाल कहानी : (Hindi Kids Story) सुबह का भूला- सोनू आठवीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई लिखाई और खेलकूद दोनों में ही वह काफ़ी अच्छा था। देखने भालने में भी बुरा नहीं था। परन्तु उसकी एक आदत बड़ी खराब थी।

प्रायः सोनू अपने साथियों से झूठ बोलता रहता। उन्हें किसी न किसी बहाने परेशान करने और मूर्ख बनाने में उसे बड़ा आनन्द मिलता था।

ऐसा करते समय वह कभी नहीं सोचता कि उसके साथी इस बात से कितने दुखी होतेे थे।

एक बार सोनू ने अपनी माँ से लालन्दा नाम की एक परी की कहानी सुनी। मां ने बताया था कि लालन्दा परी कठिनाई में फँसे बच्चों की बहुत सहायता करती थी। तभी सोनू के दिमाग में एक नई शरारत सूझी।

Hindi Kids Story It's Never too late

प्रेरणादायक बाल कहानी : सेवा का व्रत

अगले दिन सोनू ने अपने मित्र विकास से कहा कि लालन्दा परी बच्चों के पैसे दोगुनेे कर देती है।

वह कैसे?

विकास के पूछने पर सोनू ने बताया, कल रात को लालन्दा परी मेरे सपने में आई थी। उसने कहा कि गांव के कुएं के पास वाले पीपल की जड़ में हम जितने पैसे गाडेंगे, अगले दिन वहीं खोदने पर हमें दोगुने पैसे मिलेंगे।

शाम होने पर सोनू चुपचाप कुएं की ओर चल पड़ा। तभी आकाश में बादल छा गए। इससे चारों ओर बहुत गहरा अंधेरा हो गया।

सोनू कुएँ के पास पहुंचकर पीपल के नीचे खोदने लगा। तभी उसके कानों में मधुर संगीत के स्वर सुनाई दिए। सोनू को लगा कि पीपल के ऊपर प्रकाश सा फैल गया। उसने गर्दन उठाकर ऊपर देखा तो स्तब्ध रह गया।

लालच का नतीजा

पीपल की एक मोटी सी डाल पर एक सुन्दर परी बैठी मुस्करा रही थी। उसके चांदी जैसे सफेद कपड़ों से जैसे रोशनी की किरणें फूट पड़ी थीं। उसके सुन्दर पंखों को देखकर तो सोनू मुग्ध होने लगा।

ऐसे क्या देख रहे हो?

सोनू?

तुम कौन हो?

अरे मुझे नहीं पहचानते?

तुमने ही तो कहा था कि लालन्दा परी गाड़े गए पैसों को दोगुना कर देगी। इसलिए तो मैं यहाँ आई हूँ।

तो तुम लालन्दा परी हो?

हाँ, लेकिन यहाँ आने के लिए पूरे आकाश में उड़ना पड़ा। इतनी देर तक मैं एक साथ कभी नहीं उड़ी। मैं बहुत थक गई हूँ।

तो तुमने इतनी तकलीफ क्यों उठाई?

सोनू ने उत्सुकता के साथ पूछा तो लालन्दा परी कहने लगी। केवल अपने आप को सच्चा रखने के लिए।

क्या मतलब?

Hindi Kids Story It's Never too late

मतलब यह कि तुमने मेरा नाम लेकर विकास से झूठ कहा। अगर मैं यहाँ आकर उसके पैसे दुगुने नहीं करती तो वह मुझे झूठी और धोखेबाज़ कहता। इसमें मेरी कितनी बदनामी होती?

लालन्दा परी की बात सुनकर सोनू सोच में पड़ गया।

क्या सोचने लगे सोनू?

मैं सोच रहा था कि अपने आपको झूठा होने से बचाने के लिए आपने कितनी पेरशानी उठाई है। पर क्या मजाक में बोले झूठ से भी बदनामी होती है?

झूठ तो झूठ ही होता है चाहे वह हँसी ही क्यों ना हों।

झूठ बोलने वाले का मान नहीं रहता।भविष्य में कोई उसका विश्वास नहीं करता और कठिनाई आने पर कोई उसका साथ नहीं देता।

लालन्दा परी की बात सुनकर सोनू दुखी हो उठा। उसे अपनी भूल का आभास हो गया और वह मन ही मन पश्चाताप भी करने लगा। उसकी यह दशा देखकर लालन्दा परी उसे समझाने लगी।

सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आए तो वह भूला नहीं कहलाता। तुम वचन दो कि आगे से कभी झूठ बोलकर किसी को परेशान नहीं करोगेे। और हाँ विकास को भी सब सच सच बता दोगेे।

मैं वचन देता हूँ।

अगले दिन सोनू विकास के पास स्कूल जाने से पहले गया। उसे अपने झूठ और लालन्दा परी वाली सारी बात सच सच बता दी।

Facebook Page

17Oct2020

बाल कहानी : (Hindi Kids Story) दीपावली का क्या महत्व है?- दशहरे का त्यौहार अभी बीता भी न था कि पलक झपकते ही दीपावली आ गई। कितनी मधुरता व सौम्यता है इस नाम में इसका अर्थ है ‘दीपों की पंक्ति’ हरिवंशराय बच्चन ने भी कहा है-

15Oct2020

जंगल कहानी (Jungle Story): वनराज की अदालत – बंदर पेड़ों की डालियों पर झूलता हुआ आया और हथौड़ा उठाकर टन-टन-टन से घंटा बजा दिया। जिसकी आवाज सुनकर जंगली जानवर अपनी अपनी फरियाद लेकर बरगद के नीचे वाली अदालत में आ गए।

15Oct2020

प्रेरणादायक बाल कहानी (Inspirational Kids Story) : सेवा का व्रत- प्राचीन काल में गंगा नदी के किनारे एक मुनि का आश्रम था। मुनि का नाम टंडुल था। टंडुल मुनि रात-दिन तप किया करते थे। फलस्वरूप टंडुल मुनि को कई सिद्धियाँ प्राप्त हुई थीं।

एक रात्रि में टंडुल मुनि अपने आश्रम में विश्राम कर रहे थे। अर्द्धरात्रि को लुटेरों का एक दल वहाँ आया। लुटेरों ने नगर के कई मकानों सें सेंध मार कर मूल्यवान वस्तुओं को लूट लिया था। लूट की वस्तुयें उनके पास थी। राजा के सैनिकों ने लुटेरों का पीछा किया तो वे टंडुल मुनि के आश्रम में आकर छुप गये थे। टंडुल मुनि गहरी निद्रा में थे। इसलिए उन्हें लुटेरों के आगमन का कुछ पता नहीं चला। लुटेरों ने रात्रि वहीं बिताने का निश्चय किया और वे सब माल-असबाब के साथ सो गये।

सुबह उठकर टंडुल मुनि का ध्यान सोये हुए लुटेरों की ओर गया तो वे आश्चर्य चकित रह गये। उन्होंने वस्तुयें लूट की देखी तो उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने लुटेरों को जगाकर कहा। तुम सब शीघ्र यहाँ से चले जाओ। यदि तुमने भागने में विलम्ब किया तो मैं तुम सबको शाप दूँगा।

Inspirational Kids Story A Vow To Serve

Inspirational Kids Story : बाल कहानी : झूठ का फल

लुटेरे टंडुल मुनि का क्रोध देख भयभीत हो गए और माल-असबाब के साथ भाग खड़े हुए। भाग-दौड़ में एक कलश वहाँ छोड़ गये थे।

टंडुल मुनि ने दूसरे दिन आँगन में कलश पड़ा हुआ देखा तो आश्चर्य चकित रह गये। उन्हें क्रोध आया और उन्होंने कलश उठाया और नदी में फेंक देने के विचार से गंगा नदी की ओर प्रस्थान किया।

रास्ते में विचार किया कि उनका कमंडल छोटा है। फल-वृक्षों को पानी देने में असक्षम है। यदि मैं कलश रख लूँ तो अधिक जल लाकर वृक्षों को सींच सकता हूँ। अच्छा होगा कि मैं यह कलश फैंक देने के बजाये रख लँू। वृक्षों और फूलों को सींचने के लिए इसमें अधिक जल लाया करूगाँ। यह विचार टंडुल मुनि को उपयुक्त लगा और वे कलश लेकर आश्रम वापस लौट गए। उन्होंने नदी से जल लाकर वृक्षों और फल-फूलों को सींचा। मगर आश्चर्य उन्हें तब हुआ जब उन्होंने देखा कि फल,फूल और वृक्ष कुछ ही देर बाद सूख गये। टंडुल मुनि गुस्सा हो उठे। उन्होंने आसन लगाकर साधना की। एक देवता ने प्रकट होकर कहा मुनिराज! यह कलश अनिष्टकारी है। लूट का कलश संग्रह करना हानिकारक है। इसे फेंक दीजिए। इसके जल से तुमने वृक्षों को सींचा है और इसी पाप से वे सब मुरझा गए।

Inspirational Kids Story : चालाक राजा को शिक्षा देती ये बाल कहानी

टंडुल मुनि ने पश्चाताप किया और कलश उठाया, नदी की ओर गये और उन्होंने कलश नदी में फेंक दिया। एक चरवाहा यह देख रहा था। उसने कलश निकाल लिया। उसमें उसने जल भरा और आने-जाने वाले लोगों को निःशुल्क जल पिलाने लगा।

कुछ दिनों में उस चरवाहे की निःशुल्क सेवा और उस कलश की सर्वत्र चर्चा होने लगी। टंडुल मुनि के कानों में भी यह बात आई तो चरवाहे और उस कलश को देखने उस स्थान पर पहुँचे जहाँ वह चरवाहा अपने पशुओं के साथ प्यासे लोगों को निःशुल्क पानी पिलाने में व्यस्त था।

टंडुल मुनि ने उस चरवाहे से पूछा तुम्हें यह कलश कहाँ से प्राप्त हुआ बेटा।

चरवाहे ने टंडुल मुनि को प्रणाम कर कहा। ‘‘मुनिराज मुझे यह कलश गंगा नदी से प्राप्त हुआ था कुछ समय पूर्व। किसी ने कलश गंगा नदी में फेंक दिया था।

टंडुल मुनि ने चरवाहे को कलश-वृतांत सुनाकर कहा। ‘‘बेटा, यह कलश अनिष्टकारी है। इसे फेंक आओ।’’

Inspirational Kids Story A Vow To Serve

Inspirational Kids Story : प्रेरणादायक कहानी : रावण का श्राप

चरवाहे ने कहा। ‘‘मुनिराज! मैं कलश कैसे फेंकू दूँ। इसके जल ने कई प्यासे लोगों और यात्रियों की प्यास बुझाई है। यह अनिष्टकारी नहीं हो सकता और न यह कलश किसी का अहित कर सकता है। इसने कितने ही लोगों की आत्मा को तृप्त किया है। यह कलश तो असंख्य लोगों को जल पिलाकर परोपकार से प्रत्येक वस्तु का गुण बदल जाता है। मुझे भी इसी कलश के कारण मनुष्यों की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुनिवर, आप तो भलीभाँति जानते हैं। सेवा करना ही वास्तविक धर्म है।’’

चरवाहे की बात सुनकर टंडुल मुनि की आँखें खुल गई। उन्होंने चरवाहे का आभार प्रकट किया और उसी दिन से लोगों की सेवा करने का वचन ले लिया।

Facebook Page

14Oct2020

Diwali Hindi Story for Kids: सुबह-सुबह हम अपनी बैठक में बैठे अखबार पढ़ रहे थे कि हमारे कानों में चर्चा ज्ञान का तकियाक्लाम सुनायी पड़ा- ‘अमां किसकी बनी रही है, किसकी बनी रहेगी।

21Sep2020

एक चित्रकार था जिसकी दो बेटियाँ थीं। उसकी एक बेटी बहुत सुंदर और दूसरी बेटी बदसूरत थी। चित्रकार को अपनी सुंदर बेटी को देखकर बहुत खुशी होती थी और वह उसी को देखकर अपनी चित्रकारी करता था।

21Sep2020

एक समय की बात है एक चालाक राजा था जिसका दिल और दिमाग दुनिया के बाकी देशों को हासिल करने, लोगों को डराने में लगा रहता था। उसने दूसरे देशों को आग और तलवार से नष्ट किया था और उसके सैनिकों ने खेतों में जाकर किसानों की झोपड़ियों को आग लगा दिया था।

19Sep2020

प्रेरणादायक कहानी : रावण का श्राप लंका नामक स्वर्ण मंडित नगरी की पश्चिमी समरभूमि पर घमासान युद्ध चल रहा था। एक ओर रामचन्द्र जी की वानर सेना डटी थी तो दूसरी ओर लंकाधिपति रावण की भयंकर राक्षसी सेना। दोनों सेनाओं के वीर योद्धा प्राणों से जूझ रहे थे। आज समर भूमि में एक अनोखा कोलाहल और विचित्र उत्तेजना व्याप्त थी। वानर सेना के समरनायक स्वयं प्राभु श्रीराम थे जबकि राक्षसी सेना का हौंसला लंकाधिपति महाबली रावण स्वयं युद्ध का संचालन कर रहा था।

19Sep2020

Jungle Story भगवान का दूत: उल्लू वन में सिर्फ उल्लू ही रहते थे। इसलिए उन्हें यह पता नहीं था कि उनके सिवा कोई ऐसा पंछी होता है जो दिन में भी देख सकता हो।
एक दिन अचानक उल्लू वन में एक काला, लंबी चोंच वाला कौआ आ पहुँचा। उसने चश्मा पहन रखा था। उसकी गर्दन में एक थैला लटक रहा था।
रात होतेे ही वन के उल्लू झुण्ड बनाकर उस विचित्र पंछी को देखने पहुँचे। एक उल्लू ने पास आकर उससे पूछा, आप कौन है? और कहाँ से आये हैं?