सम्राट और बूढ़ा आदमी: आम के पेड़ की अद्भुत कहानी

Feb 19, 2026, 05:29 PM

सम्राट और बूढ़ा आदमी

कहानी 'सम्राट और बूढ़ा आदमी' प्राचीन भारत के पाटलिपुत्र में घटित होती है, जहाँ सम्राट विक्रमसेन राज्य करते थे। वे मानते थे कि सिर्फ वही काम करना चाहिए जिसका तत्काल लाभ मिले।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

एक दिन, सम्राट ने एक 80 वर्षीय बूढ़े आदमी को आम का पौधा लगाते देखा और सोचा कि वह इसके फल खाने के लिए नहीं बचेगा।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

बूढ़े आदमी ने समझाया कि वह अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पेड़ लगा रहा है, जैसे उसके पूर्वजों ने उसके लिए किया था।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

बूढ़े की बातों ने सम्राट को प्रभावित किया और उन्हें निस्वार्थ कर्म का महत्व समझ आया। उन्होंने महसूस किया कि सच्ची महानता दूसरों के लिए कुछ करने में है।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

सम्राट ने बूढ़े आदमी की निस्वार्थ सेवा के लिए उसे सोने के सिक्के दिए। बूढ़े ने इसे अपने पौधे का त्वरित फल बताया, जो सम्राट को हंसी में डाल गया।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

इस घटना के बाद, सम्राट ने राज्य में कई योजनाएं शुरू कीं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभदायक थीं,

सम्राट और बूढ़ा आदमी

जैसे नहरें, धर्मशालाएं और विद्यापीठ।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

कहानी का मुख्य संदेश है कि हमें केवल अपने लाभ के लिए नहीं,

सम्राट और बूढ़ा आदमी

बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी काम करना चाहिए।

सम्राट और बूढ़ा आदमी

यह कहानी हमें सकारात्मक सोच और निस्वार्थ सेवा का महत्व सिखाती है, जो सुखी जीवन का मंत्र है।