Posts Tagged "Bal kahani"

17Feb2021

चंपक जंगल में एक चालाक शेरनी रहती थी। उसके चार और प्यारे छोटे छोटे बच्चे थे। वह इतने छोटे थे कि अभी तक उनकी आंखे भी नहीं खुली थी। वह ज़्यादातर समय सोते रहते थे और जब वह उठते थे तो उनकी मां उन्हें दूध पिलाती थी। लेकिन अगर उनकी मां एक मिनट भी लेट हो जाती तो उसके बच्चे इतना चिल्लाते कि पूरी गुफा को हिलाकर रख देते। उसी जंगल में एक और शेर रहता था। वह बूढ़ा था।

14Jan2021

Moral Story बगुला और नीली मछली : एक नदी के किनारे एक बरगद का पेड़ था। उस पेड़ में एक बगुला रहता था। वह अक्सर नदी के किनारे मछली और केकड़े का शिकार करता था। एक दिन उसने देखा कि एक सुंदर सी नीली मछली पानी में तैर रही है। बगुले को वह सुंदर मछली बहुत भा गई। उसने मछली से कहा, “नीली मछली, नीली मछली, क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?” 

7Dec2020

कालू नाम का एक भालू गाँव के बाहर वाले जंगल में रहता था। वह देखने में जितना काला कलूटा था। मन से उससे भी अधिक काला था। ऊपर से मीठी मीठी बातें करता था और मौका मिलते ही उन्हें चट कर देता। छोटे जानवर तो प्रायः चिकनी चुपड़ी बातों के जाल में फंस ही जाते थे।

5Dec2020

बाल कहानी : (Hindi Kids Story) राशि की भूख हड़ताल नहीं…नहीं…नहीं, जब तक ‘मेरा नया बस्ता नहीं आ जाता मैं खाना नहीं खाऊँगी राशि ने चीख कर कहा। ‘पर तुम्हें नये बस्ते की क्या जरूरत है, बेटी?’ माँ ने उसे समझाना चाहा, ‘तुम्हारा बस्ता तो बिल्कुल नया है, प्यारा सा’ उन्होंने बस्ता हाथ में लेकर कहा।

3Dec2020

छोटू हाथी को जंगल में फलों की दुकान लगाए बहुत अधिक समय नहीं हुआ था। फिर भी उसकी आय काफी अच्छी होने लगी थी। छोटू हाथी बहुत ही ईमानदार और मेहनती था। वह सदा अच्छे फल खरीदकर लाता। उन्हें साफ रखता और यदि कभी कोई फल गलसड़ जाता तो वह किसी को नहीं देता, बल्कि उसे फेंक देता।

2Dec2020

संजय की खुशी का ठिकाना न था। वह आठवीं कक्षा की परीक्षा में प्रथम आया था। खेल कूद में भी उसे कई पुरस्कार मिले थे। स्कूल के हेडमास्टर साहब सक्सेना जी ने, पूरे स्कूल के सामने संजय की प्रशंसा की थी। पुरस्कार हाथ में लिए संजय सोच रहा था कि जब वह घर जाकर अपनी सफलता के बारे में अपने पिता जी को बताएगा तब वे कितने खुश होंगे।

5Nov2020

बाल कहानी : (Hindi Kids Story) सुबह का भूला- सोनू आठवीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई लिखाई और खेलकूद दोनों में ही वह काफ़ी अच्छा था। देखने भालने में भी बुरा नहीं था। परन्तु उसकी एक आदत बड़ी खराब थी।

प्रायः सोनू अपने साथियों से झूठ बोलता रहता। उन्हें किसी न किसी बहाने परेशान करने और मूर्ख बनाने में उसे बड़ा आनन्द मिलता था।

ऐसा करते समय वह कभी नहीं सोचता कि उसके साथी इस बात से कितने दुखी होतेे थे।

एक बार सोनू ने अपनी माँ से लालन्दा नाम की एक परी की कहानी सुनी। मां ने बताया था कि लालन्दा परी कठिनाई में फँसे बच्चों की बहुत सहायता करती थी। तभी सोनू के दिमाग में एक नई शरारत सूझी।

Hindi Kids Story It's Never too late

प्रेरणादायक बाल कहानी : सेवा का व्रत

अगले दिन सोनू ने अपने मित्र विकास से कहा कि लालन्दा परी बच्चों के पैसे दोगुनेे कर देती है।

वह कैसे?

विकास के पूछने पर सोनू ने बताया, कल रात को लालन्दा परी मेरे सपने में आई थी। उसने कहा कि गांव के कुएं के पास वाले पीपल की जड़ में हम जितने पैसे गाडेंगे, अगले दिन वहीं खोदने पर हमें दोगुने पैसे मिलेंगे।

शाम होने पर सोनू चुपचाप कुएं की ओर चल पड़ा। तभी आकाश में बादल छा गए। इससे चारों ओर बहुत गहरा अंधेरा हो गया।

सोनू कुएँ के पास पहुंचकर पीपल के नीचे खोदने लगा। तभी उसके कानों में मधुर संगीत के स्वर सुनाई दिए। सोनू को लगा कि पीपल के ऊपर प्रकाश सा फैल गया। उसने गर्दन उठाकर ऊपर देखा तो स्तब्ध रह गया।

लालच का नतीजा

पीपल की एक मोटी सी डाल पर एक सुन्दर परी बैठी मुस्करा रही थी। उसके चांदी जैसे सफेद कपड़ों से जैसे रोशनी की किरणें फूट पड़ी थीं। उसके सुन्दर पंखों को देखकर तो सोनू मुग्ध होने लगा।

ऐसे क्या देख रहे हो?

सोनू?

तुम कौन हो?

अरे मुझे नहीं पहचानते?

तुमने ही तो कहा था कि लालन्दा परी गाड़े गए पैसों को दोगुना कर देगी। इसलिए तो मैं यहाँ आई हूँ।

तो तुम लालन्दा परी हो?

हाँ, लेकिन यहाँ आने के लिए पूरे आकाश में उड़ना पड़ा। इतनी देर तक मैं एक साथ कभी नहीं उड़ी। मैं बहुत थक गई हूँ।

तो तुमने इतनी तकलीफ क्यों उठाई?

सोनू ने उत्सुकता के साथ पूछा तो लालन्दा परी कहने लगी। केवल अपने आप को सच्चा रखने के लिए।

क्या मतलब?

Hindi Kids Story It's Never too late

मतलब यह कि तुमने मेरा नाम लेकर विकास से झूठ कहा। अगर मैं यहाँ आकर उसके पैसे दुगुने नहीं करती तो वह मुझे झूठी और धोखेबाज़ कहता। इसमें मेरी कितनी बदनामी होती?

लालन्दा परी की बात सुनकर सोनू सोच में पड़ गया।

क्या सोचने लगे सोनू?

मैं सोच रहा था कि अपने आपको झूठा होने से बचाने के लिए आपने कितनी पेरशानी उठाई है। पर क्या मजाक में बोले झूठ से भी बदनामी होती है?

झूठ तो झूठ ही होता है चाहे वह हँसी ही क्यों ना हों।

झूठ बोलने वाले का मान नहीं रहता।भविष्य में कोई उसका विश्वास नहीं करता और कठिनाई आने पर कोई उसका साथ नहीं देता।

लालन्दा परी की बात सुनकर सोनू दुखी हो उठा। उसे अपनी भूल का आभास हो गया और वह मन ही मन पश्चाताप भी करने लगा। उसकी यह दशा देखकर लालन्दा परी उसे समझाने लगी।

सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आए तो वह भूला नहीं कहलाता। तुम वचन दो कि आगे से कभी झूठ बोलकर किसी को परेशान नहीं करोगेे। और हाँ विकास को भी सब सच सच बता दोगेे।

मैं वचन देता हूँ।

अगले दिन सोनू विकास के पास स्कूल जाने से पहले गया। उसे अपने झूठ और लालन्दा परी वाली सारी बात सच सच बता दी।

Facebook Page

10Jun2020

सावन का महीना था, पूर्णिमा से दो दिन पहले ही रीटा राखियाँ लेकर अपने गाँव चली गई। शंभू भईया गाँव में ही रहते थे। डाॅक्टरी पढ़कर लौटे थे तो शहर में नौकरी लगी थी पर वह गए नहीं। उनका कहना था कि पढ़ लिखकर सभी युवक यदि गाँव छोड़कर शहर में बस जायेंगे तो गाँव का उत्थान कैसे होगा।