अब पछताए होत क्या | Jungle Story

Feb 05, 2026, 10:35 AM

अब पछताए होत क्या

समय और अवसर किसी का इंतज़ार नहीं करते, और यदि इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो पछतावा ही हाथ लगता है। यह कहानी एक आलसी तेंदुए, रफ़्तार, और दूरदर्शी शेर, शेरा, के बीच की है।

अब पछताए होत क्या

'दण्डक वन' में शेरा ने मानसून के भयानक तूफान की भविष्यवाणी की और खुद को बचाने के लिए ऊँची गुफा में सुरक्षित स्थान तैयार किया, जबकि रफ़्तार ने इसे नजरअंदाज किया।

अब पछताए होत क्या

रफ़्तार को अपनी रफ़्तार पर घमंड था और उसने शेरा की चेतावनी को हल्के में लिया। उसने सोचा कि जब भी जरूरत होगी, वह अपनी गति से सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाएगा।

अब पछताए होत क्या

जब तूफान आया, तो रफ़्तार की गति कीचड़ में फंस गई और वह सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुँच सका। वह घायल हो गया और ठंड में कांपता रहा।

अब पछताए होत क्या

शेरा अपनी सुरक्षित और गर्म गुफा में था, जबकि रफ़्तार को तूफान में भीगते हुए रात गुजारनी पड़ी। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने शेरा से मदद की गुहार लगाई।

अब पछताए होत क्या

अगली सुबह, जब तूफान थमा, रफ़्तार ने अपनी गलती को स्वीकार किया और शेरा से माफी मांगी।

अब पछताए होत क्या

शेरा ने उसे समझाया कि समय रहते तैयारी करना ही समझदारी है।

अब पछताए होत क्या

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि भविष्य की सुरक्षा के लिए पहले से तैयारी करना आवश्यक है और घमंड को त्याग कर समझदारी से काम लेना चाहिए।

अब पछताए होत क्या

रफ़्तार ने कसम खाई कि वह भविष्य में कभी भी आज के काम को कल पर नहीं टालेगा और अपनी रफ़्तार से ज्यादा अपनी बुद्धिमानी पर भरोसा करेगा।

अब पछताए होत क्या

यह कहानी हमें समय की कीमत और पूर्व-तैयारी का महत्व समझाती है। जो समय का सम्मान नहीं करता, उसे अंत में पछताना पड़ता है।