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'अभिमान का अंत' एक शिक्षाप्रद कहानी है जो भारत के जंगल 'नंदनवन' में रहने वाले 'बादल' नामक बारहसिंगा पर आधारित है, जो अपनी सुंदरता पर अत्यधिक गर्व करता था।
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बादल के सुंदर सींग और सुनहरी त्वचा उसे जंगल में सबसे आकर्षक बनाते थे, लेकिन उसे अपने पतले पैरों से नफरत थी और वह उन्हें बदसूरत मानता था।
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एक दिन, बादल की सुंदरता पर गर्व और पैरों को लेकर शिकायत ने उसे कछुए की सलाह को नजरअंदाज करने के लिए प्रेरित किया, जिसने उसे शरीर के हर अंग के महत्व के बारे में बताया।
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जब शिकारी शेर ने बादल पर हमला किया, तो उसके पतले पैर उसे तेजी से दौड़ने में मदद करते हैं, जिससे वह शेर से बच निकलता है।
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बादल के 'सुंदर' सींग घने जंगल की लताओं में फंस जाते हैं, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ जाती है, लेकिन उसके पैर उसे खींचकर बचाने की कोशिश करते हैं।
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अंत में, बादल अपने सींगों को मुक्त करने में सफल होता है और एक गुफा में छिपकर अपनी जान बचाता है, जिससे उसे अपनी गलती का एहसास होता है।
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बादल को समझ आता है कि जिसे वह सुंदर मानता था, वही उसकी मुसीबत का कारण बन गया, जबकि उसके पैरों ने उसकी जान बचाई।
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इसके बाद, बादल अपने अभिमान को छोड़कर विनम्र बन जाता है और अपने पैरों की देखभाल करने लगता है, साथ ही जंगल के अन्य जानवरों से माफी मांगता है।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि असली सुंदरता उपयोगिता में है और हर चीज का अपना महत्व होता है।
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यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि घमंड का सिर हमेशा नीचा होता है और हमें कभी भी अपनी खूबसूरती पर अभिमान नहीं करना चाहिए।
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