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इस कहानी में बादशाह अकबर ने एक भयानक सपना देखा जिसमें उनके सभी दाँत टूट गए थे और केवल एक दाँत बचा था। इस सपने की वजह से वह बहुत परेशान हो गए थे।
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ज्योतिषियों ने इस सपने की व्याख्या अशुभ के रूप में की, जिससे अकबर नाराज हो गए और उन्होंने ज्योतिषियों को दरबार से निकाल दिया।
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बीरबल ने अकबर के सपने को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा और बताया कि इस सपने का अर्थ है कि अकबर अपने परिवार में सबसे अधिक उम्र तक जीवित रहेंगे।
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बीरबल की इस चतुर व्याख्या से अकबर खुश हुए और उन्होंने बीरबल को इनाम में सोने की मोहरें दीं।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सच बोलना अच्छी बात है, लेकिन उसे सकारात्मकता के साथ पेश करना महत्वपूर्ण है ताकि यह सुनने वाले को ठेस न पहुँचाए।
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बीरबल का असली नाम महेश दास था, और 'बीरबल' का खिताब उन्हें अकबर ने उनकी बुद्धिमानी के लिए दिया था।
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अकबर पढ़-लिख नहीं सकते थे क्योंकि उन्हें 'डिस्लेक्सिया' था, लेकिन उनकी याददाश्त बहुत तेज थी।
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बीरबल अकबर के नवरत्नों में से एक थे और सैन्य अभियानों में सेनापति की भूमिका भी निभाते थे।
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बीरबल ने अकबर द्वारा चलाए गए धर्म 'दीन-ए-इलाही' को अपनाया था और वे एक अच्छे कवि भी थे,
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जिनकी कविताएँ आज भी संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
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