अंधे के हाथ बटेर लगना: गोलू और जादुई घड़े का रहस्य

Jan 10, 2026, 12:22 PM

अंधे के हाथ बटेर लगना

कहानी "अंधे के हाथ बटेर लगना" गोलू नामक एक आलसी लड़के की है, जो बिना मेहनत किए किस्मत से खजाना पाता है, लेकिन इसे संभाल नहीं पाता।

अंधे के हाथ बटेर लगना

गोलू हिमालय की वादियों में बसे नीलांचल गाँव का सबसे आलसी लड़का था, जो काम करने से हमेशा कतराता था, और किस्मत के भरोसे रहता था।

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एक दिन, गोलू के पास एक बाज के पंजों से गिरा पीतल का घड़ा आ गिरता है, जिसमें प्राचीन सिक्के और रत्न होते हैं, जिससे उसकी किस्मत चमक उठती है।

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गोलू को बिना मेहनत के मिली इस सफलता पर घमंड हो जाता है और वह इसे संभालने की बुद्धिमानी नहीं दिखाता, जिससे वह इसे खो देता है।

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उसकी लापरवाही के कारण चोर उसके घर में घुसकर खजाना चुरा लेते हैं, जिससे उसे एहसास होता है कि बिना मेहनत के मिली चीज़ें स्थायी नहीं होतीं।

अंधे के हाथ बटेर लगना

चिंटू, गोलू का दोस्त, उसे समझाता है कि किस्मत से मिली चीज़ों को संभालने के लिए मेहनत और समझदारी की जरूरत होती है।

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इस घटना के बाद, गोलू अपनी आदतें बदलता है और मेहनत करने की ठानता है,

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जिससे वह एक मेहनती किसान के रूप में पहचान बनाता है।

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कहानी यह प्रेरणा देती है कि असली सफलता और खुशी वही होती है, जो मेहनत और योग्यता से हासिल की जाती है,

अंधे के हाथ बटेर लगना

और बिना मेहनत के मिली चीज़ें कभी स्थायी नहीं रहतीं।