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कहानी "अंधे के हाथ बटेर लगना" गोलू नामक एक आलसी लड़के की है, जो बिना मेहनत किए किस्मत से खजाना पाता है, लेकिन इसे संभाल नहीं पाता।
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गोलू हिमालय की वादियों में बसे नीलांचल गाँव का सबसे आलसी लड़का था, जो काम करने से हमेशा कतराता था, और किस्मत के भरोसे रहता था।
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एक दिन, गोलू के पास एक बाज के पंजों से गिरा पीतल का घड़ा आ गिरता है, जिसमें प्राचीन सिक्के और रत्न होते हैं, जिससे उसकी किस्मत चमक उठती है।
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गोलू को बिना मेहनत के मिली इस सफलता पर घमंड हो जाता है और वह इसे संभालने की बुद्धिमानी नहीं दिखाता, जिससे वह इसे खो देता है।
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उसकी लापरवाही के कारण चोर उसके घर में घुसकर खजाना चुरा लेते हैं, जिससे उसे एहसास होता है कि बिना मेहनत के मिली चीज़ें स्थायी नहीं होतीं।
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चिंटू, गोलू का दोस्त, उसे समझाता है कि किस्मत से मिली चीज़ों को संभालने के लिए मेहनत और समझदारी की जरूरत होती है।
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इस घटना के बाद, गोलू अपनी आदतें बदलता है और मेहनत करने की ठानता है,
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जिससे वह एक मेहनती किसान के रूप में पहचान बनाता है।
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कहानी यह प्रेरणा देती है कि असली सफलता और खुशी वही होती है, जो मेहनत और योग्यता से हासिल की जाती है,
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और बिना मेहनत के मिली चीज़ें कभी स्थायी नहीं रहतीं।
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