अंधेरे का डर: आरव और जूडो चैंपियन

Feb 16, 2026, 11:36 AM

अंधेरे का डर

आरव एक होनहार छात्र था, लेकिन उसे अंधेरे का बहुत डर था, जिसे वह अपने परिवार के अलावा किसी से साझा नहीं करता था।

अंधेरे का डर

आरव के पिता ने उसे टेलीस्कोप के माध्यम से अंधेरे से परिचित करवाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास असफल रहा क्योंकि आरव का ध्यान तारों की बजाय छत के कोनों में छिपे अंधेरे पर था।

अंधेरे का डर

स्कूल में एक एडवेंचर कैंप की घोषणा हुई, जिससे आरव घबरा गया क्योंकि उसे जंगल के अंधेरे में दो रातें बितानी थीं।

अंधेरे का डर

कैंप में आरव ने विक्रम, जो स्कूल का जूडो चैंपियन था, को अपना साथी चुना, यह सोचकर कि वह उसे सुरक्षित महसूस कराएगा।

अंधेरे का डर

रात के दौरान, आरव को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि विक्रम भी अंधेरे से डरता है, जिससे आरव को हिम्मत मिली और उसने विक्रम को सांत्वना दी।

अंधेरे का डर

आरव ने विक्रम को यह विश्वास दिलाया कि वह उसके साथ है और उसे अंधेरे से डरने की जरूरत नहीं है, जिससे विक्रम को राहत मिली।

अंधेरे का डर

इस अनुभव ने आरव को यह सिखाया कि जब हम किसी की मदद करते हैं, तो हमारा खुद का डर भी खत्म हो जाता है।

अंधेरे का डर

आरव ने न केवल एक सच्चा दोस्त पाया बल्कि अपने सबसे बड़े डर 'अंधेरे' को भी हरा दिया।

अंधेरे का डर

कहानी का संदेश यह है कि डर केवल मन का वहम है और मदद करने से हमें हिम्मत मिलती है।

अंधेरे का डर

यह कहानी यह भी दर्शाती है कि हर किसी को किसी न किसी चीज से डर लगता है, चाहे वह कितना भी बहादुर क्यों न दिखे।