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'अपने मुँह मियाँ मिट्ठू' मुहावरे पर आधारित यह कहानी नीलगिरी के जंगल के चिक्कू तोते की है, जो अपनी खूबसूरती और क्षमता की बढ़-चढ़कर तारीफ करता है।
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चिक्कू तोता हमेशा अपनी तारीफ करता था, जिससे जंगल के बाकी जानवर परेशान थे। वह खुद को सबसे श्रेष्ठ मानता था और दूसरों की खूबियों को नजरअंदाज करता था।
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जंगल में सूखा पड़ने पर, शेर ने नीली घाटी की ओर जाने का कठिन रास्ता तय करने का निर्णय लिया। चिक्कू ने दावा किया कि वह सबको सही रास्ता दिखा सकता है, जबकि उसे वास्तव में नक्शा देखना भी नहीं आता था।
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चिक्कू के गलत मार्गदर्शन के कारण जानवर एक भूलभुलैया में फंस गए। कालू कौवे ने अपनी बुद्धिमानी से सही दिशा पहचानी और सबको नीली घाटी तक पहुँचाया।
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चिक्कू तोते को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने समझा कि असली काबिलियत वह है जिसे दूसरे पहचानें, न कि खुद की शेखी बघारने से।
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इस अनुभव के बाद, चिक्कू ने अपनी आत्म-प्रशंसा छोड़ दी
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और दूसरों की मदद करने लगा। अब उसकी तारीफ पूरा जंगल करता था।
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कहानी का नैतिक यह है कि इंसान को अपनी तारीफ खुद नहीं करनी चाहिए।
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असली काबिलियत आपके काम में दिखनी चाहिए, न कि आपकी बातों में।
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यह प्रेरणादायक कहानी बच्चों को समझाती है कि अहंकार और आत्म-प्रशंसा से बचना चाहिए और दूसरों की खूबियों की भी सराहना करनी चाहिए।
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