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यह कहानी वीर हिरण और गौरी की है, जिन्होंने अपने बच्चे चिंटू को एक खूंखार तेंदुए से बचाने के लिए अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल किया।
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जंगल के कानून के अनुसार ताकतवर ही बचता है, लेकिन इस कहानी में परिवार का प्यार और समझदारी ने बड़ी ताकत को मात दी।
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चिंटू खेलते-खेलते झुंड से दूर हो गया और तेंदुआ कालिया उसकी ओर बढ़ने लगा, जिससे चिंटू की जान खतरे में पड़ गई।
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वीर और गौरी ने तेंदुए से सीधे लड़ने के बजाय एक योजना बनाई। गौरी ने तेंदुए का ध्यान भटकाने के लिए घायल होने का नाटक किया।
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जैसे ही कालिया का ध्यान गौरी पर गया, वीर ने तेंदुए पर हमला कर दिया, जिससे कालिया का संतुलन बिगड़ गया।
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इस बीच, चिंटू ने खुले मैदान की ओर भागना शुरू कर दिया, क्योंकि हिरण खुले मैदान में तेंदुए से तेज दौड़ सकते हैं।
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अंततः तीनों अपने झुंड के पास पहुंच गए, जहां सौ से ज्यादा हिरणों के सींग तेंदुए का इंतजार कर रहे थे,
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और कालिया को पीछे हटना पड़ा।
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कहानी हमें सिखाती है कि मुसीबत के समय केवल बल नहीं, बल्कि बुद्धि की भी जरूरत होती है।
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परिवार का एकजुट होना बड़ी से बड़ी मुश्किल को हल कर सकता है।
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