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इस कहानी में बताया गया है कि हर मीठी बातें करने वाला व्यक्ति सच्चा दोस्त नहीं होता। कहानी का मुख्य पात्र रंकु, एक सुरीला मुर्गा है, जो अपनी आवाज़ पर गर्व करता है।
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रंकु के जीवन में एक चालाक लोमड़ी, चमेली, आती है, जो उसकी तारीफों के ज़रिए उसे फंसाने की कोशिश करती है। चमेली की तारीफों से रंकु को भ्रम हो जाता है कि वह उसकी सच्ची दोस्त है।
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शेरू कुत्ता, रंकु को चेतावनी देता है कि चमेली पर भरोसा न करे, लेकिन रंकु उसकी बात नहीं सुनता और चमेली की मीठी बातों में फंस जाता है।
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चमेली एक दिन रंकु को जंगल में दावत के बहाने बुलाती है, लेकिन उसका असली मकसद रंकु को शिकार बनाना होता है।
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जब रंकु को चमेली की धोखाधड़ी का पता चलता है, तो वह अपनी सूझबूझ से चमेली को यह विश्वास दिलाता है कि उसने ज़हरीला कीड़ा खा लिया है।
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चमेली इस धोखे में आकर डर जाती है और रंकु को छोड़कर भाग जाती है।
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रंकु अपनी जान बचाकर खेत में लौट आता है।
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इस घटना से रंकु को यह सीख मिलती है कि सच्चा दोस्त वही होता है
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जो कठिन समय में सही मार्गदर्शन करे, न कि केवल चापलूसी करे।
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कहानी का नैतिक संदेश है कि चापलूसी से बचें और दोस्ती हमेशा सच्चे और समान इरादों वाले लोगों से ही करें।
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