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यह कहानी चंदनपुर गाँव के एक छोटे से लड़के रोहन की है, जो अपनी ईमानदारी और बुद्धिमता से एक लालची ज़मींदार को सबक सिखाता है।
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रोहन अपने दादा-दादी के साथ रहता था और उनके छोटे से खेत में मेहनत करता था। उसके माता-पिता का बचपन में ही निधन हो गया था।
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गाँव का ज़मींदार, दुर्जन सिंह, गरीब किसानों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज़ देकर उनकी ज़मीन हड़पने का काम करता था।
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रोहन के दादा जी ने भी दुर्जन सिंह से पैसे उधार लिए थे, लेकिन ब्याज की वजह से कर्ज़ बढ़ता ही जा रहा था।
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दुर्जन सिंह ने पंचायत में एक धोखेबाज़ी भरी शर्त रखी कि अगर रोहन सही पत्थर चुनता है तो कर्ज़ माफ होगा।
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रोहन ने देखा कि दुर्जन सिंह ने दोनों काले पत्थर थैली में डाले थे, लेकिन उसने सूझबूझ से काम लेते हुए पत्थर को गिरा दिया।
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रोहन ने कहा कि बचा हुआ पत्थर देखने से पता चल जाएगा कि उसने कौन सा पत्थर चुना था। बचा हुआ पत्थर काला था, जिससे साबित हुआ कि रोहन ने सफेद पत्थर चुना था।
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इस प्रकार, रोहन की सूझबूझ से उसकी ज़मीन कर्ज़ मुक्त हो गई और गाँव वालों ने उसे नायक मान लिया।
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कहानी हमें सिखाती है कि ईमानदारी और बुद्धिमता से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है।
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माता-पिता से सुझाव है कि वे बच्चों को ऐसी नैतिक कहानियाँ सुनाएँ जो उनकी समस्या समाधान क्षमता को बढ़ाए।
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