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'बहादुरी का इनाम' कहानी में चीनू बाज़ की साहसिक गाथा का वर्णन है,
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जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर 'गरुड़ घाटी' को विनाश से बचाया।
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चीनू बाज़, जो 'आकाश का पहरेदार' कहलाता था, घाटी की निगरानी करता था और हमेशा मुसीबत में दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहता था।
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एक भयानक तूफान के बाद, घाटी के इकलौते झरने का रास्ता बंद हो गया और एक छोटा हिरण 'मिंकू' गुफा में फंस गया, जिससे घाटी में संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई।
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जब बड़े जानवर चट्टान हटाने में असफल रहे, तो चीनू ने अपने तर्क और साहस का उपयोग करके समस्या का समाधान खोजा।
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चीनू ने एक साहसिक योजना बनाई, जिसमें उसने एक छोटे पत्थर को धक्का देकर बड़ी चट्टान को हटाने का निर्णय लिया, जिससे झरने का मार्ग खुल गया और मिंकू सुरक्षित बाहर आ गया।
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चीनू की बहादुरी और बुद्धिमानी के लिए उसे 'प्रधान संरक्षक' का सम्मान मिला और इस दिन को 'साहस दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सच्ची बहादुरी और बुद्धिमानी का पुरस्कार सम्मान और प्रेम के रूप में मिलता है,
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और समस्याओं का समाधान केवल शारीरिक शक्ति से नहीं, बल्कि सही अवलोकन और तर्क से भी निकाला जा सकता है।
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चीनू की कहानी ने जंगल के सभी जानवरों को यह सिखाया कि बुद्धि और साहस का मेल किसी भी मुसीबत को हरा सकता है।
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