Read Full Story
विजयनगर राज्य के महाराज विक्रम सिंह को पहेलियाँ सुलझाने और मंत्रियों की बुद्धिमानी की परीक्षा लेने का शौक था।
Read Full Story
एक दिन महाराज ने मंत्री सुमति को 'बैल का दूध' लाने का असंभव कार्य सौंपा, जिससे दरबार में सभी चौंक गए।
Read Full Story
सुमति की बेटी आराध्या, जो बहुत चतुर थी, ने इस समस्या का समाधान निकालने की जिम्मेदारी ली।
Read Full Story
आधी रात को आराध्या ने महाराज के शयनकक्ष के पास कपड़े धोने का नाटक किया, जिससे महाराज की नींद खुली।
Read Full Story
महाराज के पूछने पर आराध्या ने कहा कि उसके पिता ने एक बच्चे को जन्म दिया है, इसलिए उसे कपड़े धोने का समय रात को मिला।
Read Full Story
महाराज ने आराध्या की बात को मूर्खतापूर्ण बताते हुए कहा कि आदमी बच्चे को जन्म नहीं दे सकता, जैसे बैल दूध नहीं दे सकता।
Read Full Story
आराध्या की इस चतुराई से महाराज को अपनी गलती और असंभव मांग की निरर्थकता का अहसास हुआ।
Read Full Story
महाराज ने आराध्या की बुद्धिमानी की प्रशंसा की और उसे उपहार दिए, साथ ही अपना आदेश वापस ले लिया।
Read Full Story
इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सही तर्क और बुद्धि से बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
Read Full Story
तर्क शक्ति और साहस से सामने वाले को उसकी गलती का अहसास दिलाना आवश्यक होता है।
Read Full Story