बैल का दूध: महाराज की अजीब शर्त

Feb 09, 2026, 10:36 AM

बैल का दूध

विजयनगर राज्य के महाराज विक्रम सिंह को पहेलियाँ सुलझाने और मंत्रियों की बुद्धिमानी की परीक्षा लेने का शौक था।

बैल का दूध

एक दिन महाराज ने मंत्री सुमति को 'बैल का दूध' लाने का असंभव कार्य सौंपा, जिससे दरबार में सभी चौंक गए।

बैल का दूध

सुमति की बेटी आराध्या, जो बहुत चतुर थी, ने इस समस्या का समाधान निकालने की जिम्मेदारी ली।

बैल का दूध

आधी रात को आराध्या ने महाराज के शयनकक्ष के पास कपड़े धोने का नाटक किया, जिससे महाराज की नींद खुली।

बैल का दूध

महाराज के पूछने पर आराध्या ने कहा कि उसके पिता ने एक बच्चे को जन्म दिया है, इसलिए उसे कपड़े धोने का समय रात को मिला।

बैल का दूध

महाराज ने आराध्या की बात को मूर्खतापूर्ण बताते हुए कहा कि आदमी बच्चे को जन्म नहीं दे सकता, जैसे बैल दूध नहीं दे सकता।

बैल का दूध

आराध्या की इस चतुराई से महाराज को अपनी गलती और असंभव मांग की निरर्थकता का अहसास हुआ।

बैल का दूध

महाराज ने आराध्या की बुद्धिमानी की प्रशंसा की और उसे उपहार दिए, साथ ही अपना आदेश वापस ले लिया।

बैल का दूध

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सही तर्क और बुद्धि से बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।

बैल का दूध

तर्क शक्ति और साहस से सामने वाले को उसकी गलती का अहसास दिलाना आवश्यक होता है।