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'बंदा हाज़िर हो' कहानी गप्पू नाम के एक 10 वर्षीय बच्चे की है, जो हर बात को अक्षरश: सच मान लेता है और इस वजह से गाँव में कई मजेदार घटनाएँ होती हैं।
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गप्पू के इस व्यवहार की शुरुआत तब होती है जब वह एक नाटक में दरबारी का संवाद "हुज़ूर, बंदा हाज़िर है!" सुनता है और इसे अपना मूल मंत्र बना लेता है।
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मिठ्ठू लाल की मिठाई की दुकान पर गप्पू मक्खियों को भगाने के लिए झाड़ू और पानी का इस्तेमाल करता है, जिससे मिठ्ठू लाल का गुस्सा बढ़ जाता है।
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स्कूल में मास्टर जी द्वारा "आकाश-पाताल एक कर देना" के कहने पर गप्पू सचमुच छत और जमीन को जोड़ने की कोशिश करता है, जिससे मास्टर जी हैरान रह जाते हैं।
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गाँव के सरपंच ठाकुर ढीले सिंह की दावत में गप्पू मेहमान के पैरों में सचमुच लेट जाता है, जिससे वकील साहब कीचड़ में गिर जाते हैं।
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गाँव के लोग गप्पू के इस व्यवहार से डरने लगते हैं, लेकिन चोरों को पकड़वाने में गप्पू की 'बंदा हाज़िर' वाली आदत काम आती है।
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पंचायत में सरपंच गप्पू को समझाते हैं कि हर बात को दिल से समझना चाहिए, न कि केवल शब्दों से।
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कहानी का संदेश है कि आज्ञाकारी होना अच्छी बात है, लेकिन उसमें अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।
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गप्पू अब भी खुशमिज़ाज है और सबकी मदद करता है, लेकिन अब वह हर बात को समझकर ही 'बंदा हाज़िर हो' कहता है।
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इस कहानी के माध्यम से बच्चों को हास्य के साथ-साथ विवेकपूर्ण व्यवहार की सीख मिलती है।
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