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'बेईमानी की सजा' कहानी झुमरू बंदर की दास्तान पर आधारित है, जो बच्चों को ईमानदारी और मेहनत का महत्व सिखाती है।
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रंगीला वन में झुमरू नामक एक आलसी और बेईमान बंदर रहता था, जो दूसरों की मेहनत का मजाक उड़ाता था।
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जंगल के राजा शेर सिंह ने एक प्रतियोगिता की घोषणा की, जिसमें सबसे ज्यादा शहद-बेरी लाने वाले को शाही गुफा में रहने का सम्मान देने का वादा किया गया।
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मेहनती चीकू खरगोश ने कठिन परिश्रम कर के अपनी टोकरी भर ली, जबकि झुमरू ने धोखे से पत्थरों से अपनी टोकरी भारी कर दी।
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झुमरू की टोकरी सबसे भारी होने के कारण उसे विजेता घोषित कर दिया गया, परंतु उसकी बेईमानी जल्द ही उजागर हो गई।
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जब सर्दियों में भंडार घर खोला गया, तो झुमरू की टोकरी में सिर्फ पत्थर और गंदगी निकली, जिससे उसकी बेईमानी सबके सामने आ गई।
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झुमरू को शाही गुफा से निकाल दिया गया और भूखे रहना पड़ा, जिससे उसे अपनी गलती का अहसास हुआ।
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दयालु चीकू ने झुमरू की मदद की और उसे कुछ भोजन दिया, जिससे झुमरू ने सबके सामने माफी मांगी और बेईमानी न करने की कसम खाई।
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कहानी का नैतिक संदेश यह है कि बेईमानी से मिला फल कभी सुख नहीं देता
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और ईमानदारी का रास्ता कठिन होते हुए भी सच्चे सम्मान और सुरक्षा की ओर ले जाता है।
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