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यह कहानी 'सूर्यपुर' गाँव की नन्ही रोशनी की है, जिसने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से समाज की पुरानी सोच को बदलकर एक मिसाल पेश की।
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रोशनी के गाँव में लड़कियों की शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन उसकी तड़प को उसके दादाजी ने पहचाना और उसके पिता को उसे स्कूल भेजने के लिए राजी किया।
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स्कूल में रोशनी को ताने सुनने पड़े, लेकिन उसने विज्ञान और गणित में अपनी रुचि बनाए रखी और अपने गाँव की बिजली की समस्या का समाधान खोजने का संकल्प लिया।
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रोशनी ने सौर ऊर्जा के उपयोग से एक सौर-लैंप बनाया, जिसने अंधेरे में डूबे गाँव को रोशन कर दिया, जिससे गाँववाले उसकी प्रतिभा को पहचानने लगे।
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उसकी इस उपलब्धि ने उसे राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में भाग लेने का अवसर दिया, जहाँ उसने 'सस्ता सौर सिंचाई मॉडल' प्रस्तुत किया और प्रथम स्थान प्राप्त किया।
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मुख्यमंत्री ने रोशनी को सम्मानित किया और यह साबित किया कि 'बेटी बचाओ, देश बचाओ' केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक सच्चाई है।
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रोशनी को छात्रवृत्ति मिली और उसने बड़े शहर के कॉलेज में प्रवेश प्राप्त किया, जिससे गाँव के अन्य लोग भी अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित हुए।
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आज रोशनी एक बड़ी वैज्ञानिक बन चुकी है और देश के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिससे उसका गाँव 'स्मार्ट विलेज' बन चुका है।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि बेटियाँ हमारे देश का अनमोल धन हैं और उनकी शिक्षा पूरे समाज की सोच बदल सकती है।
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'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के महत्व पर जोर देते हुए, यह कहानी हमें बताती है कि एक सशक्त बेटी ही एक सशक्त राष्ट्र की पहचान है।
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