ब्राह्मण और सर्प की कहानी: लालच और अटूट भरोसे का सबक

Jan 22, 2026, 06:15 PM

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

'शांतिपुर' गाँव के ब्राह्मण सोमदत्त की कहानी है, जो मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था। उसके पास संपत्ति नहीं थी, लेकिन एक दिन उसके खेत में एक दिव्य नाग प्रकट हुआ।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

सोमदत्त ने नाग को दूध चढ़ाया, जिससे नाग ने उसे एक सोने का सिक्का दिया। यह प्रक्रिया रोज़ चलने लगी और सोमदत्त की आर्थिक स्थिति सुधर गई।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

सोमदत्त ने अपनी समृद्धि का रहस्य किसी से साझा नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि धन के साथ ईर्ष्या भी आती है।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

एक बार सोमदत्त को गाँव से बाहर जाना पड़ा, तो उसने अपने बेटे रोहन को नाग की सेवा का काम सौंपा।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

रोहन लालची था और उसने सोचा कि नाग के बिल में और भी सोने के सिक्के होंगे। उसने नाग को मारने की कोशिश की, लेकिन नाग ने स्वयं की रक्षा करते हुए रोहन को डस लिया।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

रोहन की मृत्यु ने सोमदत्त को गहरा दुख दिया, लेकिन वह समझ गया कि यह उसके बेटे के लालच का परिणाम था।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

नाग ने सोमदत्त से कहा कि उनके बीच विश्वास अब नहीं बचा है,

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

और अंतिम बार एक रत्न देकर वह हमेशा के लिए ओझल हो गया।

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

कहानी का मुख्य संदेश यह है कि अत्यधिक लालच विनाश का कारण बनता है

ब्राह्मण और सर्प की कहानी

और विश्वास एक बार टूट जाए, तो फिर कभी जुड़ नहीं सकता।