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'शांतिपुर' गाँव के ब्राह्मण सोमदत्त की कहानी है, जो मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था। उसके पास संपत्ति नहीं थी, लेकिन एक दिन उसके खेत में एक दिव्य नाग प्रकट हुआ।
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सोमदत्त ने नाग को दूध चढ़ाया, जिससे नाग ने उसे एक सोने का सिक्का दिया। यह प्रक्रिया रोज़ चलने लगी और सोमदत्त की आर्थिक स्थिति सुधर गई।
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सोमदत्त ने अपनी समृद्धि का रहस्य किसी से साझा नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि धन के साथ ईर्ष्या भी आती है।
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एक बार सोमदत्त को गाँव से बाहर जाना पड़ा, तो उसने अपने बेटे रोहन को नाग की सेवा का काम सौंपा।
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रोहन लालची था और उसने सोचा कि नाग के बिल में और भी सोने के सिक्के होंगे। उसने नाग को मारने की कोशिश की, लेकिन नाग ने स्वयं की रक्षा करते हुए रोहन को डस लिया।
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रोहन की मृत्यु ने सोमदत्त को गहरा दुख दिया, लेकिन वह समझ गया कि यह उसके बेटे के लालच का परिणाम था।
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नाग ने सोमदत्त से कहा कि उनके बीच विश्वास अब नहीं बचा है,
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और अंतिम बार एक रत्न देकर वह हमेशा के लिए ओझल हो गया।
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कहानी का मुख्य संदेश यह है कि अत्यधिक लालच विनाश का कारण बनता है
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और विश्वास एक बार टूट जाए, तो फिर कभी जुड़ नहीं सकता।
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