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यह कहानी एक मजेदार हिंदी कहानी है जो "छप्पर फाड़ के" मुहावरे पर एक अनोखी और शिक्षाप्रद मोड़ देती है।
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गोलू नामक लड़का रामपुर गांव में रहता था, जो आलसी था और खाने का बहुत शौकीन था। वह मेहनत करने से बचता था और भगवान से दुआ करता था कि उसे बिना मेहनत के आम मिल जाएं।
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एक दिन, गोलू ने भगवान से प्रार्थना की कि उसे छप्पर फाड़ के आम मिल जाएं। उसे नहीं पता था कि गोदाम की छत के ऊपर बंदरों का एक समूह आम तोड़कर बैठा था।
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बंदरों के वजन से कमजोर छत टूट गई और आमों के साथ बंदर भी गोलू के ऊपर गिर गए। गोलू डरकर चिल्लाया कि भूत आया है।
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गोलू की मां ने उसे हंसते हुए कहा कि भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली है और उसे छप्पर फाड़ के आम मिल गए हैं।
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गोलू ने महसूस किया कि बिना मेहनत के मिली चीजें अक्सर मुसीबत लाती हैं
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और मेहनत की कमाई का स्वाद ज्यादा मीठा होता है।
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कहानी का संदेश है कि मुहावरों को सीरियसली नहीं लेना चाहिए
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और मेहनत के बिना मिली चीजें अक्सर सिरदर्दी लाती हैं।
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यह कहानी बच्चों को हंसाने के साथ-साथ यह भी सिखाती है कि शॉर्टकट के चक्कर में नुकसान हो सकता है।
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