चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों का मज़ेदार रहस्य

Jan 24, 2026, 03:35 PM

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

'चमतकारपुर' राज्य के महाराजा गजेंद्र सिंह की सभा में एक व्यापारी मायाजाल ने अदृश्य हीरों की कहानी सुनाई, जो केवल सच्चे और ईमानदार लोगों को दिखते हैं।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

दरबारियों ने अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए अदृश्य हीरों की तारीफ की, हालांकि उन्हें कुछ नहीं दिखा।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

चतुर बिरजू ने व्यापारी की चालाकी को समझ लिया और उसने महाराज से अदृश्य हीरों की सफाई के लिए 'अदृश्य गंगाजल' लाने का नाटक किया।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

बिरजू ने व्यापारी मायाजाल के चेहरे पर 'अदृश्य पानी' छिड़कते हुए नाटक किया और व्यापारी को यह दिखाने के लिए मजबूर किया कि वह हीरे का मालिक नहीं है।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

बिरजू ने महाराज को सुझाव दिया कि अदृश्य हीरे को फर्श पर पटका जाए

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

ताकि मधुर संगीत सुनाई दे, जिससे व्यापारी की असलियत सामने आ सके।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

व्यापारी मायाजाल ने अंततः स्वीकार किया कि कोई हीरा नहीं है और वह महाराज को ठगने की कोशिश कर रहा था।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

महाराज ने मायाजाल को कारागार में डाल दिया और बिरजू की बुद्धिमानी की सराहना करते हुए उसे असली हीरों का हार इनाम में दिया।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

कहानी का मुख्य संदेश है कि बुद्धि और तर्क से किसी भी झूठ का पर्दाफाश किया जा सकता है और असत्य का साथ नहीं देना चाहिए।

चतुर बिरजू और 'अदृश्य' हीरों

पूरे दरबार ने बिरजू की चतुराई और उसकी हँसी की सराहना की, जो इस मजेदार कहानी का सार है।