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'चमतकारपुर' राज्य के महाराजा गजेंद्र सिंह की सभा में एक व्यापारी मायाजाल ने अदृश्य हीरों की कहानी सुनाई, जो केवल सच्चे और ईमानदार लोगों को दिखते हैं।
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दरबारियों ने अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए अदृश्य हीरों की तारीफ की, हालांकि उन्हें कुछ नहीं दिखा।
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चतुर बिरजू ने व्यापारी की चालाकी को समझ लिया और उसने महाराज से अदृश्य हीरों की सफाई के लिए 'अदृश्य गंगाजल' लाने का नाटक किया।
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बिरजू ने व्यापारी मायाजाल के चेहरे पर 'अदृश्य पानी' छिड़कते हुए नाटक किया और व्यापारी को यह दिखाने के लिए मजबूर किया कि वह हीरे का मालिक नहीं है।
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बिरजू ने महाराज को सुझाव दिया कि अदृश्य हीरे को फर्श पर पटका जाए
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ताकि मधुर संगीत सुनाई दे, जिससे व्यापारी की असलियत सामने आ सके।
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व्यापारी मायाजाल ने अंततः स्वीकार किया कि कोई हीरा नहीं है और वह महाराज को ठगने की कोशिश कर रहा था।
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महाराज ने मायाजाल को कारागार में डाल दिया और बिरजू की बुद्धिमानी की सराहना करते हुए उसे असली हीरों का हार इनाम में दिया।
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कहानी का मुख्य संदेश है कि बुद्धि और तर्क से किसी भी झूठ का पर्दाफाश किया जा सकता है और असत्य का साथ नहीं देना चाहिए।
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पूरे दरबार ने बिरजू की चतुराई और उसकी हँसी की सराहना की, जो इस मजेदार कहानी का सार है।
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