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'चतुर बिल्ली की कहानी' एक पंचतंत्र की कहानी है, जो हमें सिखाती है कि अपने झगड़ों को बाहरी दुश्मनों के बजाय घर में ही सुलझाना चाहिए, क्योंकि शत्रु कभी मित्र नहीं हो सकता।
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कहानी में चीकू चिड़ा और रोलू खरगोश के बीच घर को लेकर विवाद होता है। चीकू अपने घर को छोड़कर खाने की खोज में जाता है और जब लौटता है, तो देखता है कि रोलू ने उसके घर पर कब्जा कर लिया है।
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चीकू और रोलू के बीच इस घर को लेकर काफी बहस होती है। वे निर्णय लेते हैं कि किसी धर्मपंडित के पास जाकर न्याय मांगेंगे।
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दोनों एक बिल्ली मंदाकिनी के पास पहुंचते हैं, जो साधु का भेष बनाए बैठी होती है। वह उन्हें अपनी मीठी बातों से फंसा लेती है और न्याय का नाटक करती है।
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चीकू और रोलू धोखे में आकर बिल्ली के पास जाते हैं। चीकू और रोलू धोखे में आकर बिल्ली के पास जाते हैं।
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जंगल के अन्य जानवरों ने इस घटना से सीखा कि दुश्मनों को कभी मध्यस्थ नहीं बनाना चाहिए,
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और आपसी समझौते से ही समस्याओं का समाधान हो सकता है।
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बिल्ली का असली रूप सामने आता है और वह दोनों को मार देती है।
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इस कहानी का निष्कर्ष यह है कि आपसी विवाद को दुश्मनों के पास ले जाने के बजाय घर में या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के पास सुलझाना चाहिए।
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कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि मूर्खता और आपसी अविश्वास का परिणाम हमेशा दुखद होता है।
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