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चतुर बीरबल की कहानी में बताया गया है कि मुगल बादशाह अकबर और उनके नवरत्न बीरबल के बीच की नोक-झोंक और बुद्धिमानी भरे किस्से आज भी लोगों को हँसाते हैं।
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एक दिन दरबार में अकबर ने एक अजीब सवाल पूछा कि अगर कोई उनकी मूंछ खींचे, तो उसे क्या सजा मिलनी चाहिए। इस पर दरबारियों ने गुस्से में कठोर सजाएं सुझाईं।
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बीरबल ने सबको चौंकाते हुए कहा कि मूंछ खींचने वाले को मिठाई खिलानी चाहिए। दरबारियों ने इसे मजाक समझा और बीरबल का मजाक उड़ाया।
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बीरबल ने तर्क दिया कि सिर्फ बादशाह का पोता ही बिना डर के उनकी मूंछ खींच सकता है, और उसे सजा नहीं, बल्कि प्यार मिलता है।
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अकबर को याद आया कि उनके पोते ने सुबह उनकी मूंछ खींची थी, जिस पर वे हँस पड़े
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और बीरबल की चतुराई की सराहना की।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि हर समस्या का समाधान ठंडे दिमाग और समझदारी से करना चाहिए, न कि गुस्से में।
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बीरबल की हाज़िरजवाबी और बुद्धिमानी ने न केवल बादशाह का गुस्सा शांत किया
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बल्कि माहौल को भी खुशनुमा बना दिया।
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यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि जल्दबाजी में कोई राय नहीं बनानी चाहिए और बात की गहराई को समझना चाहिए।
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