चतुर चैतन्य और लाल मोर: जादुई पक्षी का रहस्य

Jan 17, 2026, 12:47 PM

चतुर चैतन्य और लाल मोर

कहानी "चतुर चैतन्य और लाल मोर" में एक बुद्धिमान सलाहकार चैतन्य और चापलूस मंत्री दुर्जन सिंह के बीच के द्वंद्व को दर्शाया गया है।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

चित्रमयी राज्य के राजा महाराज महेंद्र को दुर्लभ वस्तुओं का शौक था, और दुर्जन सिंह अपनी चापलूसी से उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करता था।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

दुर्जन सिंह ने एक साधारण मोर को लाल रंग से रंगवाकर उसे जादुई पक्षी 'अग्नि-मयूर' के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे राजा ने उसे इनाम देने की घोषणा की।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

चैतन्य ने मोर की अस्वाभाविकता और उससे आ रही गंध के आधार पर उसे नकली बताया और राजा को सलाह दी कि मोर को स्नान कराया जाए।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

चैतन्य की योजना के अनुसार, मोर के ऊपर गुलाब जल के साथ नींबू का रस और तेल छिड़का गया, जिससे उसका लाल रंग उतर गया।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

मोर के असली रंग उजागर होने पर राजा महेंद्र ने दुर्जन सिंह को दंडित किया और चैतन्य को इनाम दिया।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

चैतन्य ने अपने इनाम को राज्य के अकाल पीड़ित लोगों की मदद के लिए दान कर दिया।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

कहानी से यह सीख मिलती है कि धोखा और चापलूसी से कुछ समय के लिए सफलता मिल सकती है,

चतुर चैतन्य और लाल मोर

लेकिन अंत में ईमानदारी और बुद्धिमानी ही काम आती है।

चतुर चैतन्य और लाल मोर

यह कहानी यह भी दर्शाती है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ और झूठ का सहारा लेना हमेशा अपमान का कारण बनता है।