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नीलगिरी वन की कहानी में टीटू नाम का एक कछुआ है, जो अपनी बुद्धिमानी और धैर्य से पूरे जंगल को विनाश से बचाता है। यह कहानी बच्चों को नैतिक शिक्षा देती है कि धैर्य सबसे बड़ी ताकत है।
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जंगल में एक घमंडी चीता सिंबा भी है, जो अपनी तेज़ रफ्तार पर गर्व करता है और छोटे जानवरों का मज़ाक उड़ाता है। लेकिन जब जंगल में भीषण सूखा पड़ता है, सिंबा की तेज़ी भी बेकार साबित होती है।
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सूखे के कारण जंगल के जानवर बहुत परेशान हो जाते हैं, और शेर राजा को चिंता होती है कि अगर जल्द ही पानी नहीं मिला, तो उन्हें जंगल छोड़ना पड़ेगा।
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सिंबा अपनी तेज़ी से पूरे जंगल में पानी की खोज करता है, लेकिन असफल रहता है। तब टीटू आगे आता है और अपनी शांति और बुद्धिमानी से पानी का स्रोत खोजने की बात करता है।
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टीटू का अवलोकन बताता है कि एक सूखे बरगद के पेड़ के नीचे पानी की गुप्त धारा हो सकती है, क्योंकि वहाँ की जड़ें नरम हैं और काली चींटियाँ नम जगहों पर रहती हैं।
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जानवर उस जगह पर खुदाई शुरू करते हैं और जल्द ही उन्हें ठंडे और मीठे पानी की धारा मिल जाती है। पूरी जंगल खुश हो जाता है और टीटू की बुद्धिमानी की तारीफ करता है।
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सिंबा को समझ आता है कि सिर्फ रफ्तार से मीलों तय किए जा सकते हैं, लेकिन गहराई में जाने के लिए धैर्य और बुद्धि की जरूरत होती है।
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राजा टीटू को "जंगल का रक्षक" घोषित करता है, और अब कोई भी उसे 'धीमा' नहीं कहता। सब समझ जाते हैं कि टीटू एक 'छुपा रुस्तम कछुआ' है।
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यह कहानी सिखाती है कि किसी की योग्यता का अंदाज़ा उसकी रफ्तार या बाहरी चमक-धमक से नहीं लगाना चाहिए। धैर्य और बुद्धिमानी की शक्ति सबसे बड़ी होती है।
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हर जीव की अपनी एक विशेष भूमिका होती है, और धैर्यवान व्यक्ति अक्सर वह देख लेता है जिसे जल्दबाज़ लोग अनदेखा कर देते हैं।
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