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इंदौर के संस्कार पब्लिक स्कूल में वार्षिक खेल दिवस से पहले 'बेस्ट स्टूडेंट ऑफ द ईयर' का सोने का मेडल गायब हो गया, जिससे स्कूल में हंगामा मच गया।
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प्रिंसिपल ने चोरी के लिए विक्की नाम के एक शरारती छात्र पर शक जताया, लेकिन आर्यन नाम के एक शांत और बुद्धिमान छात्र को विक्की की निर्दोषता पर विश्वास था।
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आर्यन, जो जासूसी उपन्यासों का शौकीन था, ने प्रिंसिपल से ऑफिस की जांच करने की अनुमति मांगी और सुराग ढूंढने में जुट गया।
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आर्यन ने ऑफिस में खुली खिड़की, मिट्टी के निशान और लाल रंग के धागे का सुराग पाया, जिससे उसे कुछ संदेह हुआ।
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खिड़की के बाहर एक गुलमोहर के पेड़ पर एक चमकदार वस्तु देखकर आर्यन ने प्रिंसिपल को बताया कि चोर कोई इंसान नहीं, बल्कि एक कौवा है।
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माली काका ने पेड़ पर चढ़कर कौवे के घोंसले से सोने का मेडल और लाल रिबन के टुकड़े बरामद किए, जिससे विक्की निर्दोष साबित हुआ।
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प्रिंसिपल ने विक्की से माफी मांगी और आर्यन की समझदारी की तारीफ की, जिससे आर्यन स्कूल का हीरो बन गया।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि बिना सबूत के किसी पर इल्जाम नहीं लगाना चाहिए और सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
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आर्यन ने साबित किया कि जासूसी के लिए तेज दिमाग और पैनी नजर की जरूरत होती है, न कि वर्दी या बंदूक की।
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कहानी का नैतिक यह है कि बाहरी दिखावे पर न जाकर, किसी की प्रतिभा और गुणों को पहचानना चाहिए।
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