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यह कहानी एक छोटे खरगोश चीकू की है, जो अपनी समझदारी और धैर्य से बड़ी चुनौती को पार करता है, जहां बड़े जानवर असफल हो जाते हैं।
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जंगल के राजा विक्रम सिंह ने एक प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें 'दर्पण पहाड़ी' पर उगने वाली विशेष जड़ी-बूटी लाने वाले को 'नन्हा रक्षक' घोषित किया जाएगा।
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'दर्पण पहाड़ी' कांच की तरह चिकनी और सीधी थी, जिससे बड़े जानवर जैसे चीता और लंगूर पहाड़ी पर चढ़ने में विफल रहे।
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चीकू ने पहाड़ी का ध्यानपूर्वक निरीक्षण किया और देखा कि छाया वाले हिस्से में काई जमी हुई है, जिससे चढ़ने में मदद मिल सकती है।
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उसने तिरछे रास्ते से चढ़ने का निर्णय लिया, जिससे घर्षण बढ़ा और वह फिसलने से बच गया।
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चीकू ने धैर्य और योजना का उपयोग करके पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर जड़ी-बूटी प्राप्त की।
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राजा विक्रम सिंह ने चीकू की प्रशंसा की और उसे सोने का पदक देकर सम्मानित किया,
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यह साबित करते हुए कि स्थिर दिमाग और सही तकनीक की आवश्यकता होती है।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि धैर्य और बुद्धिमानी शारीरिक बल से अधिक महत्वपूर्ण हैं,
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और सही तर्क से कठिन काम भी पूरे किए जा सकते हैं।
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