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'चोर की दाढ़ी में तिनका' एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति कोई गलत काम करता है, उसके मन में हमेशा डर बना रहता है, जिससे वह खुद ही अपनी चोरी पकड़ा देता है।
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कहानी में आनंदपुर गाँव के स्कूल के दो शरारती दोस्त, राजू और बबलू, मास्टरजी के बेसन के लड्डू चुराते हैं। मास्टरजी के लड्डू की सुगंध से उनका मन ललचाता है और वे लंच ब्रेक में चुपके से लड्डू खा लेते हैं।
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मास्टरजी जब लड्डू देखते हैं कि डिब्बा आधा खाली है, तो वे क्रोधित हो जाते हैं और बच्चों से पूछताछ करते हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं देता।
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मास्टरजी ने चालाकी से एक कहानी बनाई कि लड्डू जादुई थे और चोर की ठुड्डी पर सफेद तिनका चिपक जाएगा। यह सुनकर राजू और बबलू घबरा जाते हैं और अपनी ठुड्डी पोंछने लगते हैं।
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मास्टरजी को उनकी हरकतों से पता चल जाता है कि वही चोर हैं।
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उन्होंने राजू और बबलू को खड़ा किया और कहा कि उनका झूठ पकड़ा गया है क्योंकि उन्होंने अपनी ठुड्डी पोंछी थी।
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राजू और बबलू ने अपनी गलती मान ली और माफी मांगी। मास्टरजी ने उन्हें समझाया कि चोरी करना गलत है और ईमानदारी से काम करना चाहिए।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि डर सच उगलवा देता है और ईमानदारी को अपनाना चाहिए।
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मास्टरजी की समझदारी ने बिना डंडे के समस्या हल कर दी।
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यह कहानी बच्चों को हंसते-खेलते बड़ी सीख देती है कि गलत काम करने से बचना चाहिए और ईमानदारी से जीवन जीना चाहिए।
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