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नीलवन के जंगल की कहानी में राणा नाम का एक अकड़ू सियार और टीटू नाम का नन्हा तोता हैं, जिनकी शुरू में दुश्मनी थी, लेकिन बाद में उनकी दोस्ती हो गई।
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राणा को लगता था कि जंगल में सब उसके दुश्मन हैं और वह किसी से बात नहीं करता था, जबकि टीटू बहुत मिलनसार था और राणा से दोस्ती करना चाहता था।
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एक दिन तूफान के दौरान, राणा एक पेड़ के नीचे फंस गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा, लेकिन उसकी आवाज़ बारिश में दब गई।
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टीटू ने राणा की आवाज़ सुनकर उसकी मदद करने की ठानी और हाथियों के राजा गज्जू से मदद मांगी, जिन्होंने राणा को पेड़ के नीचे से निकाला।
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इस घटना के बाद, राणा को एहसास हुआ कि असली ताकत दोस्ती में है और उसने टीटू से माफी मांगी।
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अब राणा और टीटू अच्छे दोस्त बन गए हैं, और उनकी दोस्ती पूरे नीलवन में मशहूर हो गई है।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि सच्चा दोस्त वही होता है जो मुश्किल वक्त में काम आए,
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और दुश्मनी और घमंड से नुकसान ही होता है।
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हमें किसी के छोटे या अलग होने पर उसका मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए,
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बल्कि दोस्ती और सहयोग से बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना किया जा सकता है।
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