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आर्यन और विक्की की कहानी एक स्कूल डायरी पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि हर दोस्त सच में दोस्त नहीं होता और कई बार दोस्ती का भ्रम सिर्फ मतलबी होता है।
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आर्यन, जो पढ़ाई में अव्वल था, विक्की की मीठी बातों और कूल अंदाज़ से प्रभावित होकर उसकी दोस्ती चाहता था। हालांकि, विक्की का असली मकसद आर्यन से अपने प्रोजेक्ट्स पूरे कराना था।
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विक्की ने आर्यन को अपने घर बुलाकर प्रोजेक्ट बनाने के लिए मजबूर किया, और जब आर्यन ने इनकार किया, तो विक्की ने उसे धमकाया। लेकिन आर्यन ने बुद्धिमानी से स्थिति संभाली।
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आर्यन ने विक्की को यह कहकर बहलाया कि उसे प्रोजेक्ट बनाने के लिए घर से एक खास पेन और ज्योमेट्री बॉक्स लाना होगा, जिससे विक्की उसे जाने देने के लिए राज़ी हो गया।
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आर्यन ने विक्की के घर से बाहर निकलते ही वापस न जाने का निर्णय लिया और अपनी पढ़ाई में लग गया। उसने विक्की की चालबाजी को समझ लिया और खुद को उससे दूर कर लिया।
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अगले दिन स्कूल में आर्यन ने सच्चे दोस्त सुमित और पीटी. टीचर के साथ मिलकर विक्की का सामना किया और उसे सिखाया कि दोस्ती खरीदी नहीं जाती, बल्कि कमाई जाती है।
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विक्की को प्रोजेक्ट न जमा करने के लिए सजा मिली,
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जबकि आर्यन ने सच्चे दोस्त की पहचान और महत्व को समझा।
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इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि चापलूसी से सावधान रहना चाहिए
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और सच्चे दोस्त वही होते हैं जो गलत काम से रोकें। मुसीबत में बुद्धि से काम लेना भी आवश्यक है।
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