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कहानी चंपक लाल नामक एक कंजूस दूधवाले की है जो गोलमाल नगर में रहता है और अपने पतले दूध को गाढ़ा बनाने के लिए एक सीक्रेट फॉर्मूला खरीदता है।
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प्रोफेसर झोल नामक एक पागल वैज्ञानिक से चंपक को 'सुपर-क्रीमी फॉर्मूला 420' मिलता है, जो दूध को गाढ़ा और स्वादिष्ट बना सकता है। प्रोफेसर ने चंपक को चेतावनी दी थी कि फॉर्मूला की केवल दो बूंद ही उपयोग करें।
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चंपक की पत्नी, चमेली देवी, फॉर्मूला की पूरी शीशी दूध में डाल देती हैं, जिससे दूध रबड़ जैसी जेली में बदल जाता है और उछलने लगता है।
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फूड इंस्पेक्टर जासूस जलेबी के आने पर चंपक के दूध का गोला उछलकर एक हास्यास्पद तमाशा बन जाता है, जिससे सभी हंसने लगते हैं।
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जासूस जलेबी चंपक को साइंस के दुरुपयोग के लिए जेल भेजने का फैसला लेते हैं, क्योंकि दूध का गोला रबर की तरह बर्ताव कर रहा था।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि लालच का शॉर्टकट अपनाने से नुकसान हो सकता है
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और अधूरी जानकारी का दुरुपयोग खतरनाक हो सकता है।
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चंपक की कहानी यह संदेश देती है कि ईमानदारी से काम करना ही सबसे अच्छा है और लालच से दूर रहना चाहिए।
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कहानी में हास्य और सीख का बेहतरीन संगम है,
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जो बच्चों के लिए मनोरंजन और नैतिक शिक्षा प्रदान करता है।
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