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गीता, एक प्यारी बच्ची, रामपुर शहर में रहती थी और किस्मत पर अधिक भरोसा करती थी। वह मेहनत की तुलना में भाग्य को अधिक महत्व देती थी, जिससे उसे सफलता नहीं मिलती थी।
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एक दिन गीता को एक चमकता हुआ पुराना तांबे का सिक्का मिला, जिसे उसने जादुई समझ लिया। उसे लगा कि अब उसे किसी भी चीज़ के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।
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गीता ने गणित की परीक्षा की तैयारी नहीं की, क्योंकि उसे विश्वास था कि जादुई सिक्का उसे मदद करेगा। लेकिन परीक्षा कठिन आई और वह अच्छे अंक नहीं ला सकी।
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उसकी दादी ने उसे समझाया कि असली जादू मेहनत और लगन में होता है, न कि किसी जादुई सिक्के में। उन्होंने एक प्रेरणादायक कहानी सुनाई जिससे गीता को समझ आया कि मेहनत ही सफलता की कुंजी है।
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गीता ने इस बात को अपने जीवन में लागू किया और पेंटिंग प्रतियोगिता के लिए कड़ी मेहनत की। उसने अभ्यास किया और अंत में प्रथम पुरस्कार जीता।
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गीता ने समझा कि मेहनत और किस्मत एक-दूसरे से अलग नहीं होते। जितनी ज्यादा मेहनत होती है, किस्मत उतनी ही अच्छी होती है।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कर्म ही पूजा है
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और बिना मेहनत के केवल भाग्य के भरोसे बैठने से असफलता ही मिलती है।
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आत्मविश्वास मेहनत से आता है, और यह किसी भी 'बैड लक' को हरा सकता है।
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असली जादू हमारी कड़ी मेहनत और लगन में ही है।
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