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कहानी 'घमंडी मगरमच्छ को सबक: टिटू कछुए की बुद्धिमानी' में गगराज नामक एक घमंडी मगरमच्छ और टिटू नामक एक बुद्धिमान कछुए के बीच की कहानी है, जो भारत के जंगलों की कावेरी नदी में घटित होती है।
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गगराज अपनी ताकत के घमंड में नदी के छोटे जीवों को डराता रहता था और खुद को नदी का राजा मानता था। वहीं, टिटू कछुआ छोटा लेकिन बहुत ही चतुर था और गगराज की हरकतों को ध्यान से देखता था।
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एक दिन गगराज ने टिटू का मजाक उड़ाया, जिसे सुनकर टिटू ने उसे विनम्रता से जवाब दिया कि हर जीव की अपनी खूबियां होती हैं। इस पर गगराज ने टिटू को एक दौड़ की चुनौती दी।
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टिटू ने अपनी बुद्धिमानी का उपयोग करते हुए दौड़ का रूट मैंग्रोव जंगल के दलदली इलाके में चुना, जहां गगराज अपनी भारी शरीर के कारण फंस गया। वहीं, टिटू अपने छोटे आकार के कारण आसानी से आगे बढ़ता गया।
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दौड़ के अंत में टिटू ने 'सफेद बगुले के पेड़' की जड़ को छूकर जीत हासिल की। जंगल के जानवरों ने खुशी से टिटू की जीत का जश्न मनाया।
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गगराज शर्म से झुक गया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। टिटू ने अपनी जीत का जश्न मनाने के बजाय गगराज की मदद की और उसे दलदल से बाहर निकालने में सहायता की।
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गगराज ने अपनी गलती मानी और टिटू से माफी मांगी।
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उसने स्वीकार किया कि ताकत से ज्यादा महत्वपूर्ण बुद्धिमानी और दया होती है।
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कहानी का नैतिक: घमंड विनाश का कारण बनता है, जबकि बुद्धिमानी और दया सबसे बड़ी ताकत होती है।
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समय आने पर एक छोटा जीव भी बड़े से बड़े को मात दे सकता है।
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