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यह कहानी गोरिल्ला गजराज की है, जो जंगल में 'सिल्वरबैक' के रूप में अपने परिवार का नेता था, और स्वभाव से शांत था लेकिन ताकतवर था।
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गजराज के शांत स्वभाव के कारण जंगल के छोटे जानवर उससे डरते थे, और बंदरों का राजा मंकू उसका मजाक उड़ाता था, उसे जंगल का 'बोझ' कहता था।
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एक दिन जंगल में आग लग गई, और सभी जानवर डर के मारे भागने लगे। आग से बचने का रास्ता एक विशाल सूखा पेड़ गिरने के कारण बंद हो गया।
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छोटे जानवर पेड़ पार नहीं कर सकते थे, जबकि मंकू बंदर आसानी से कूदकर जा सकता था। वह निराश होकर चिल्लाने लगा कि सभी खत्म हो जाएगा।
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गजराज ने देखा कि छोटे जानवर फंसे हुए हैं। उसने अपनी ताकत का उपयोग करते हुए जलते हुए पेड़ के तने को उठा लिया, ताकि जानवर सुरक्षित निकल सकें।
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जानवरों ने गजराज के इस साहसिक कार्य की सराहना की और वे सुरक्षित नदी के पार चले गए। मंकू ने भी गजराज के प्रति सम्मान प्रकट किया।
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गजराज ने साबित कर दिया कि सच्ची ताकत दूसरों की रक्षा करने में होती है,
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न कि डराने में। उसके बाद से जंगल में सभी जानवर उसकी इज्जत करने लगे।
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यह कहानी सिखाती है कि असली ताकतवर वही है जो मुसीबत के समय दूसरों की मदद करता है और अपने से छोटे लोगों के लिए झुकना जानता है।
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गोरिल्ला की पारिवारिक और समझदार प्रकृति को दर्शाने वाली यह कहानी बच्चों को नैतिक शिक्षा भी देती है कि सच्चा नायक कौन होता है।
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