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'नीलगिरी वन' में तीन जिगरी दोस्त - हाथी धमचक, जिराफ लंबू, और मगरमच्छ जग्गू अपनी शारीरिक कमियों से परेशान होकर मायावी झरने के पास अपनी इच्छाएं पूरी करने जाते हैं।
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धमचक अपनी सूंड, लंबू अपनी गर्दन, और जग्गू अपने पैरों को बदलवाने की इच्छा रखते हैं। झरने के जादू से उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं।
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नई काया मिलने के बाद, तीनों को अपनी-अपनी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। धमचक पानी पीने में असमर्थ होता है, लंबू ऊंचे पेड़ों से पत्ते नहीं तोड़ पाता, और जग्गू तैरने में दिक्कत महसूस करता है।
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तेंदुए के हमले के दौरान, उनकी नई विशेषताएं उन्हें असहाय छोड़ देती हैं। वे अपनी असली ताकतों की कमी महसूस करते हैं।
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तीनों दोस्तों को अपनी गलती का अहसास होता है और वे अपनी असली पहचान को वापस पाने की प्रार्थना करते हैं।
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महामुनि के जादू के टूटने पर, धमचक, लंबू, और जग्गू अपनी पुरानी बनावट में लौट आते हैं और तेंदुए को डराकर भगा देते हैं।
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इस अनुभव के बाद, तीनों अपनी विशेषताओं को स्वीकार करते हैं और अपने शारीरिक गुणों का आनंद लेते हैं।
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कहानी का नैतिक संदेश है कि हमें अपनी पहचान और विशेषताओं पर गर्व करना चाहिए क्योंकि हर अंग का अपना महत्व होता है।
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महामुनि कछुआ दूर से उनकी दोस्ती को देखकर मुस्कुराता है, यह संदेश देते हुए कि हम जैसे हैं, वैसे ही अनमोल हैं।
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यह कहानी आत्म-स्वीकृति और स्वयं की पहचान को महत्व देने की प्रेरणा देती है।
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