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हँसमुख मोंटू खुशीपुर नामक शहर में रहता था, जहां उसकी हँसी के कारण सभी उसे 'हँसमुख मोंटू' के नाम से जानते थे।
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मोंटू की हँसी इतनी संक्रामक थी कि उसकी सकारात्मकता से लोग प्रभावित होते थे और वह हर स्थिति में हँसता रहता था।
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एक दिन मोंटू खुशीपुर के मेले में गया और समोसा खरीदकर एक पेड़ के नीचे बैठा, तभी शरारती बंदर बजरंगी ने उसका समोसा छीन लिया।
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मोंटू ने बजरंगी की हरकत पर गुस्सा करने के बजाय जोर-जोर से हँसना शुरू कर दिया, जिससे बंदर कन्फ्यूज हो गया।
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बजरंगी ने मोंटू को डराने की कोशिश की, लेकिन मोंटू की हँसी उसे और भी मजेदार लगी और उसने बंदर की नकल कर हँसना जारी रखा।
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बजरंगी ने अंत में हार मान ली और मोंटू को एक पका हुआ आम दे दिया, जिससे मोंटू और भी खुश हो गया।
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मोंटू की इस घटना ने यह साबित किया कि सकारात्मकता और हँसी से बड़ी से बड़ी मुसीबतों का सामना किया जा सकता है।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि मुसीबतों में भी मुस्कुराते रहना चाहिए और जो चीज हाथ से चली गई, उसका रोना नहीं रोना चाहिए।
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गुस्से में बंदर ने अपना नुकसान किया, जबकि मोंटू की हँसी ने उसे फायदे में रखा, जिससे सभी लोग उसकी सकारात्मकता से प्रभावित हुए।
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मोंटू की कहानी से यह संदेश मिलता है कि हँसी हर मुश्किल का हल है और सकारात्मक सोच से जीवन में खुश रह सकते हैं।
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