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कहानी "हर जीव का मोल" सुमेरपुर के राजा भवानी सिंह की है, जो अपनी ताकत और शूरवीरता के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन उन्हें लगता था कि केवल बड़ी और ताकतवर चीजें ही महत्वपूर्ण होती हैं।
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राजा भवानी सिंह ने अपने राज्य के विद्वानों और मंत्रियों से कहा कि वे उन जीवों की पहचान करें जो बेकार हैं, ताकि उन्हें राज्य से हटा दिया जाए। इस खोज में 'जंगली मक्खी' और 'मकड़ी' को बेकार घोषित किया गया।
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राजा के फरमान के बावजूद, उनके पड़ोसी राज्य के क्रूर सिंह ने अचानक सुमेरपुर पर हमला कर दिया, जिससे भवानी सिंह को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।
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भागते समय, एक जंगली मक्खी ने राजा को डंक मारकर उन्हें समय पर जगा दिया, जिससे वे दुश्मनों के हाथों से बच गए।
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भागते-भागते राजा एक गुफा में छिप गए, जहां मकड़ियों ने प्रवेश द्वार पर जाला बुन दिया। इस जाले ने सैनिकों को गुफा में जाने से रोका, जिससे राजा की जान बच गई।
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इस अनुभव से राजा ने सीखा कि हर जीव का अपना महत्व होता है और कोई भी जीव बेकार नहीं होता।
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उन्होंने अपने फैसले पर पछतावा किया और ईश्वर से माफी मांगी।
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राजा भवानी सिंह ने बाद में अपनी सेना को पुनर्गठित किया, क्रूर सिंह को हराया,
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और अपना राज्य वापस ले लिया। इस अनुभव के बाद, उन्होंने सभी जीवों की सुरक्षा का वचन दिया।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी अपने आकार या ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए और हर जीव का प्रकृति में एक विशेष स्थान और महत्व होता है।
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