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'चंपकवन' नामक हरे-भरे जंगल में जानवरों को क्रिकेट का बहुत शौक था, लेकिन गोलू हाथी इस खेल में अपनी ताकत के कारण बैट तोड़ देता था, जिससे वह उदास रहता था।
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गोलू के दोस्त चीकू खरगोश ने उसकी समस्या का हल निकालने का निर्णय लिया और कालू लकड़बग्घे से मजबूत शीशम की लकड़ी का एक विशेष बैट बनवाया।
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यह नया बैट सामान्य बैट से तीन गुना बड़ा और भारी था, जिसे केवल गोलू ही उठा सकता था।
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चंपकवन प्रीमियर लीग के फाइनल में गोलू की टीम 'बिंदास बंदर' ने 'शेरू लायंस' का सामना किया, जो एक मजबूत टीम थी।
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आखिरी ओवर में गोलू की टीम को जीतने के लिए 20 रनों की जरूरत थी और केवल एक विकेट बचा था।
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गोलू ने अपने भारी बैट से शानदार शॉट्स लगाए, जिसमें एक विशाल छक्का भी शामिल था, जिससे टीम को जीतने के लिए आवश्यक रन मिले।
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गोलू की टीम ने मैच जीत लिया और सभी जानवरों ने उसे बधाई दी; गोलू का बैट जंगल में मशहूर हो गया।
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कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपनी ताकत पर भरोसा करना चाहिए और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए दिमाग का उपयोग करना चाहिए।
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खेल में हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है मज़ा और टीम वर्क।
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यह कहानी बच्चों को प्रेरित करती है कि हर किसी के अंदर एक खास टैलेंट होता है, जिसे पहचानने की जरूरत होती है।
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