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'कनकवन' जंगल में एक रहस्यमयी बीमारी फैल जाती है, जिससे जानवरों को हफ्तों तक उठने में दिक्कत होती है, और जंगल में उदासी छा जाती है।
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राजा विकराल सिंह ने जंगल में अस्पताल बनाने का निर्णय लिया, जिसका आधा खर्च शाही खजाने से और बाकी चंदे से इकट्ठा किया गया।
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अस्पताल में दो मशहूर डॉक्टर, मंगल और दंगल, को बुलाया गया। शुरुआत में दोनों ने मेहनत से काम किया और बीमारी पर काबू पा लिया।
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धीरे-धीरे डॉक्टर दंगल के मन में लालच आ गया और उसने अस्पताल की दवाइयों को चोरी करके महंगे दामों पर बेचने का व्यापार शुरू कर दिया।
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डॉक्टर मंगल ने दंगल को समझाने की कोशिश की, लेकिन दंगल ने चोरी जारी रखी, जिससे जंगल के जानवरों को शक हुआ।
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गजराज हाथी और अन्य जानवरों ने राजा विकराल सिंह से शिकायत की। राजा ने मैना पक्षी को जासूसी का काम सौंपा, जिसने दंगल की चोरी पकड़ ली।
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राजा ने एक योजना बनाई और दूसरे जंगल में बीमार राजा के भेष में जाकर दंगल को रंगे हाथों पकड़ा।
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दंगल को जंगल से बाहर निकाल दिया गया और उसकी सारी संपत्ति जब्त करके अस्पताल के खजाने में जमा कर दी गई।
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डॉक्टर मंगल की सच्चाई और सेवा के लिए उन्हें जंगल का मुख्य राज-वैद्य बना दिया गया।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि लालच का अंत विनाशकारी होता है और ईमानदारी की हमेशा जीत होती है।
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