अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

Jan 24, 2026, 01:29 PM

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

एक भोला-भाला अनपढ़ किसान सोचता है कि चश्मा पहनने से वह पढ़ना सीख जाएगा, क्योंकि उसने गांव के पढ़े-लिखे लोगों को चश्मा लगाकर पढ़ते देखा था।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

किसान शहर जाकर एक चश्मे की दुकान में पहुंचता है और दुकानदार से पढ़ने के लिए एक चश्मा मांगता है।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

दुकानदार किसान को विभिन्न चश्मे दिखाता है और एक किताब भी थमाता है, लेकिन किसान को कुछ भी पढ़ाई नहीं आता।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

दुकानदार को तब पता चलता है कि किसान किताब को उल्टा पकड़कर पढ़ने की कोशिश कर रहा है।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

दुकानदार समझाता है कि चश्मा केवल आंखों की रोशनी सुधारता है,

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

पढ़ना सिखाना नहीं। पढ़ाई एक कला है जो सीखनी पड़ती है।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

किसान को अपनी गलतफहमी का एहसास होता है और वह वादा करता है

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

कि पहले पढ़ना सीखेगा, बाद में जरूरत पड़ने पर चश्मा लेगा।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

कहानी की सीख यह है कि उपकरण और साधन ज्ञान नहीं देते; ज्ञान मेहनत और सीखने से मिलता है।

अनपढ़ किसान और चश्मे की शिक्षाप्रद कहानी

अज्ञानता सबसे बड़ा अंधकार है और शिक्षा इसे दूर करने की एकमात्र कुंजी है। बिना मेहनत के शॉर्टकट ढूंढना मूर्खता है।