Ishwar Ki Anubhuti: नन्हे आरव और नमक के जादू का रहस्य

Jan 05, 2026, 11:40 AM

Ishwar Ki Anubhuti

यह कहानी एक जिज्ञासु बालक आरव और उसके गुरुजी के बीच के संवाद पर आधारित है, जो ईश्वर की अनुभूति को समझने के लिए एक सरल प्रयोग का उपयोग करते हैं।

Ishwar Ki Anubhuti

हिमालय की तलहटी में स्थित शांतिपुर गाँव में रहने वाला आरव गुरुजी से पूछता है कि जब लोग कहते हैं "ईश्वर हर जगह हैं", तो वे दिखाई क्यों नहीं देते।

Ishwar Ki Anubhuti

गुरुजी आरव को नमक और पानी का प्रयोग करने के लिए कहते हैं, जिससे आरव को समझ आता है कि जैसे नमक पानी में घुलकर अदृश्य हो जाता है, वैसे ही ईश्वर भी हर जगह होते हैं लेकिन दिखाई नहीं देते।

Ishwar Ki Anubhuti

इस प्रयोग के माध्यम से, गुरुजी आरव को सिखाते हैं कि ईश्वर को बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि अपने अनुभव और आचरण में महसूस किया जा सकता है।

Ishwar Ki Anubhuti

जब आरव नमक को वापस देखना चाहता है, तो गुरुजी पानी को उबालकर नमक को प्रकट करते हैं, यह दिखाने के लिए कि तप और साधना से ईश्वर की अनुभूति होती है।

Ishwar Ki Anubhuti

गुरुजी बताते हैं कि ईश्वर को खोजने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है; अच्छे कर्म और सत्य बोलने से ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव होता है।

Ishwar Ki Anubhuti

कहानी का नैतिक यह है कि अनुभव और साधना से ही ईश्वर को समझा जा सकता है, और अच्छे कर्मों के माध्यम से उन्हें अपने भीतर महसूस किया जा सकता है।

Ishwar Ki Anubhuti

संत नामदेव का उल्लेख किया गया है, जो भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, और उनके पद सिख धर्म के 'गुरु ग्रंथ साहिब' में शामिल हैं।

Ishwar Ki Anubhuti

लेखक बच्चों को यह संदेश देते हैं कि हर अच्छी सोच और नेक काम भगवान का ही रूप है,

Ishwar Ki Anubhuti

इसलिए हमेशा अच्छे बनें और दूसरों की मदद करें।