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यह कहानी सुंदरवन के एक छोटे से गरीब लड़के आर्यन की है, जो अपनी ईमानदारी और दयालुता के कारण एक जादुई बांसुरी पाता है।
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एक दिन जंगल में लकड़ियाँ बीनते समय, आर्यन एक सुनहरी गिलहरी की मदद करता है, जो वास्तव में वन-देवता होते हैं और आर्यन को जादुई बांसुरी उपहार में देते हैं।
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यह जादुई बांसुरी बजाने पर स्वादिष्ट भोजन प्रकट करती है, लेकिन यह केवल तब तक काम करती है जब तक आर्यन के मन में लालच न हो और वह दूसरों से मुंह न मोड़े।
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आर्यन और उसका परिवार बांसुरी के जादू से खुशहाल जीवन बिताने लगता है, लेकिन उसकी छोटी बहन मीठी के भोजन की जिद्दें बढ़ने लगती हैं।
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धीरे-धीरे आर्यन को लगता है कि वह मेहनत करता है, लेकिन उसका परिवार सिर्फ मजे लेता है, जिससे वह चिड़चिड़ा और स्वार्थी हो जाता है।
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एक दिन आर्यन सिर्फ अपने लिए भोजन मांगने की कोशिश करता है, लेकिन बांसुरी का जादू खत्म हो जाता है और उसे अपनी गलती का एहसास होता है।
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माँ के समझाने पर आर्यन को यह बात समझ में आती है कि असली जादू एकता और प्रेम में है, न कि बांसुरी में।
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कहानी हमें यह सीख देती है कि लालच का फल बुरा होता है, खुशियाँ बांटने से बढ़ती हैं, और दयालुता सबसे बड़ा धर्म है।
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भारतीय संस्कृति में बांसुरी का महत्व बताते हुए लेखक बच्चों को अपनी खुशियाँ और चीजें बांटने की प्रेरणा देता है।
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