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जंगल की कहानी 'सुंदरवन' में, छोटे जानवरों ने मिलकर एक खतरनाक भेड़िये, जब्बर, को हराया, जो जंगल में आतंक फैला रहा था।
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जब्बर भेड़िया अपनी ताकत और घमंड के लिए जाना जाता था और छोटे जानवरों को अपना शिकार बनाता था, जिससे जंगल में डर का माहौल बन गया था।
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मोंटी बंदर, चुनमुन खरगोश और टुनटुन चिड़िया ने समझा कि एकता में ताकत है, और उन्होंने मिलकर एक योजना बनाई।
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बूढ़े कछुए की सलाह पर, उन्होंने 'एकता में बल' का सिद्धांत अपनाया और एक टीम के रूप में काम करने का फैसला किया।
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उन्होंने एक चालाक योजना बनाई, जिसमें मोंटी ने जब्बर को कीचड़ वाली खाई की ओर आकर्षित किया, जहाँ वह फंस गया।
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टुनटुन चिड़िया और उसकी 'बर्ड ब्रिगेड' ने जब्बर को परेशान किया, जबकि चुनमुन खरगोश और उसके साथी धूल उड़ाकर उसकी आँखों में मिट्टी भरने लगे।
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जब्बर ने हार मान ली और वादा किया कि वह जंगल छोड़ देगा और कभी वापस नहीं आएगा, जिससे जानवरों ने राहत की सांस ली।
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इस घटना से सुंदरवन के जानवरों को यह समझ आया कि मिलजुलकर रहने में ही सुरक्षा है, और उन्होंने भविष्य की समस्याओं के लिए एक 'जंगल कमिटी' बनाई।
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कहानी का मुख्य संदेश यह है कि एकता और बुद्धिमत्ता से बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना किया जा सकता है।
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इस प्रेरक कहानी से यह सीखा जा सकता है कि सही योजना और सहयोग से कमजोर भी जीत सकता है।
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