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'जंगल की बेटी' कहानी अनन्या नामक बच्ची की है जो सुंदरवन नामक एक छोटे गांव में रहती है। उसे पेड़ों की सरसराहट और हवा के रुख से मौसम का अंदाजा होता है।
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अनन्या के सबसे अच्छे दोस्त गजानन, एक छोटा हाथी, और पोपटलाल, एक हरा तोता हैं। ये तीनों मिलकर जंगल के जानवरों की मदद करते हैं।
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एक साल, अत्यधिक गर्मी के कारण सुंदरवन की नीलधारा नदी सूख जाती है, जिससे गांव और जानवरों के लिए जल संकट उत्पन्न हो जाता है।
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गांव के बुजुर्ग सरपंच काका की चिंता के बावजूद, अनन्या ने अपनी दादी की कहानी के आधार पर एक गुप्त झरने को खोजने का फैसला किया।
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अनन्या, गजानन और पोपटलाल ने मिलकर पहाड़ की चढ़ाई की और गुफा के मुंह पर गिरी चट्टानों के बीच से पानी रिसता पाया।
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अनन्या ने अपनी शिक्षा का उपयोग कर उत्तोलक के सिद्धांत से चट्टानों को हटाया और पानी की धारा को मुक्त किया।
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जैसे ही पानी बहने लगा, नीलधारा नदी में फिर से पानी आ गया और गांव में खुशी लौट आई।
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सरपंच काका ने अनन्या की तारीफ करते हुए कहा कि असली ताकत दिमाग में होती है, न कि सिर्फ शरीर में।
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यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि समस्या की जड़ तक जाना, विज्ञान और बुद्धि का सही उपयोग करना, और कठिन समय में हार न मानना महत्वपूर्ण है।
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अनन्या की यह कहानी आज भी सुनाई जाती है, जो मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान भी देती है।
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