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'कबूतर का जोड़ा और शिकारी' कहानी हिमालय की तलहटी में बसे 'चंदन वन' की है, जहां कबूतरों का एक झुंड रहता था। इस झुंड के मुखिया 'गगन' और उनकी जीवनसंगिनी 'महक' थे।
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एक दिन कबूतरों का झुंड दाना चुगने के लिए उड़ता है और एक सुनसान मैदान में बिखरे अनाज के दानों को देखकर लालच में आ जाता है, जबकि गगन उन्हें सतर्क रहने को कहता है।
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गगन की चेतावनी के बावजूद, कबूतर दाना खाने के लिए नीचे उतरते हैं और शिकारी द्वारा बिछाए गए जाल में फंस जाते हैं।
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शिकारी 'भैरव' कबूतरों को पकड़ने के लिए आता है, लेकिन गगन की सूझबूझ और नेतृत्व में कबूतर एक साथ जाल के साथ उड़ जाते हैं।
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कबूतरों की सामूहिक ताकत देख शिकारी हक्का-बक्का रह जाता है और उन्हें पकड़ने में असफल रहता है।
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थकान के बावजूद, गगन कबूतरों को अपने पुराने मित्र 'चुटकु' चूहे के पास ले जाता है, जो अपने तीखे दांतों से जाल काटकर उन्हें मुक्त करता है।
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गगन अपने परिवार और साथियों की सुरक्षा पहले सुनिश्चित कराता है
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और अंत में खुद को मुक्त करवाता है, जिससे उसकी नेतृत्व क्षमता और निस्वार्थता प्रकट होती है।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि एकता में अपार शक्ति होती है
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और संकट के समय सूझबूझ और सामूहिक प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
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