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'Karen Koi Bhare Koi' की कहानी में आर्यन और ध्रुव दो दोस्त हैं, जो मुंबई के एक पॉश सोसाइटी 'मेट्रो हाइट्स' में रहते हैं। आर्यन एक शरारती और साहसी लड़का है, जबकि ध्रुव नियमों का पालन करने वाला है।
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सोसाइटी के नियम के अनुसार पार्किंग एरिया में खेलना मना है, लेकिन आर्यन अपने नए हाई-स्पीड ड्रोन को पार्किंग में उड़ाने की जिद करता है, जहां मिस्टर खन्ना की महंगी काली सेडान खड़ी होती है।
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आर्यन के ड्रोन उड़ाने के दौरान ड्रोन मिस्टर खन्ना की गाड़ी के साइड मिरर से टकरा जाता है, जिससे मिरर टूट जाता है। यह देखकर आर्यन डरकर छुप जाता है, जबकि ध्रुव वहीं खड़ा रहता है।
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मिस्टर खन्ना ध्रुव को दोषी मानते हैं और उसे डांटते हैं। ध्रुव सफाई देने की कोशिश करता है, लेकिन खन्ना जी उसकी बात नहीं सुनते और उसके पापा को फोन करने की धमकी देते हैं।
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सिक्योरिटी गार्ड रामू काका आते हैं और बताते हैं कि ध्रुव नहीं, बल्कि आर्यन ड्रोन चला रहा था। वे CCTV फुटेज दिखाते हैं, जिसमें आर्यन की गलती साफ नजर आती है।
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खन्ना जी ध्रुव से माफी मांगते हैं और आर्यन को डांटते हैं कि गलती मानना साहसी होता है, जबकि गलती करके दोस्त को फंसाना कायरता है। वे ड्रोन जब्त कर लेते हैं और नुकसान की भरपाई की बात करते हैं।
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आर्यन ध्रुव से माफी मांगता है और अपनी पॉकेट मनी से गाड़ी का नुकसान भरता है। x
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कहानी का निष्कर्ष यह है कि अपनी गलती स्वीकार करना साहसी होने का प्रतीक है
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कहानी का निष्कर्ष यह है कि अपनी गलती स्वीकार करना साहसी होने का प्रतीक है
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और सच कभी छुप नहीं सकता, चाहे आप कितनी भी चालाकी कर लें। निर्दोष को फंसाना गलत है।
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