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'खुरापाती तेंदुआ' कहानी चंपकवन के जंगल में रहने वाले टिंकू तेंदुए के बारे में है, जो अपनी शरारतों से अन्य जानवरों को परेशान करता था।
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टिंकू अपनी चालाकी और ताकत का इस्तेमाल दूसरों को डराने के लिए करता था, जिससे जंगल के छोटे जानवर उसकी हरकतों से परेशान हो गए थे।
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भोलू खरगोश और मीकू बंदर उसकी शरारतों के शिकार बने, जिससे भोलू का खाना गिर गया और मीकू बंदर की नींद खराब हो गई।
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जंगल के जानवरों ने शेर खान और गजराज हाथी के पास जाकर टिंकू की शिकायत की और उसे सबक सिखाने की योजना बनाई।
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लोमड़ी मौसी ने एक योजना बनाई जिसमें सभी जानवर मिलकर टिंकू को डराने का नाटक करते हैं।
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जब टिंकू एक अजीब प्राणी को डराने गया, तो जानवरों ने उसके ऊपर बेल और सड़े टमाटर फेंके, जिससे वह घबरा गया और भागते-भागते कीचड़ में गिर गया।
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टिंकू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने माफी मांगी। उसने समझा कि दूसरों को डराना गलत है और उसे अपनी आदत सुधारने की जरूरत है।
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टिंकू ने अब दूसरों की मदद करने का संकल्प लिया और जंगल में मददगार टिंकू के रूप में जाना जाने लगा।
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इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि मज़ाक की भी एक सीमा होती है और दूसरों को परेशान करना गलत है।
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कहानी यह भी सिखाती है कि गलती मानकर उसे सुधारना ही असली वीरता है।
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