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यह कहानी 'नंदनवन' के एक भोले हिरण सुमी की है, जिसे अपनी दोस्ती पर बहुत गर्व था, लेकिन एक शिकारी कुत्ते के हमले ने उसे सिखाया कि उसकी असली ताकत उसकी आत्मनिर्भरता है।
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सुमी एक दयालु हिरण था, जो जंगल के सभी जानवरों की मदद करता था और सोचता था कि मुसीबत के समय में उसके दोस्त उसकी सहायता करेंगे।
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कहानी के दौरान, जब जंगली कुत्तों का झुंड हमला करता है, सुमी ने गज्जू हाथी और बंटी बंदर से मदद मांगी, लेकिन दोनों ने उसे मना कर दिया, जिससे सुमी को वास्तविकता का एहसास हुआ।
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सुमी ने अपनी माँ की सलाह को याद किया कि अपनी सुरक्षा खुद करनी चाहिए और किसी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए।
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अपनी तेज गति के कारण, सुमी जंगली कुत्तों से बच निकलता है और एक सुरक्षित गुफा में पहुँच जाता है, जिससे उसे आत्मनिर्भरता का महत्व समझ में आता है।
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जब गज्जू और बंटी बाद में सुमी से मिलने आते हैं, तो सुमी उन्हें बताता है कि वह अपनी ताकत के कारण बचा है, न कि उनकी मदद से।
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इस अनुभव से सुमी ने सीखा कि अच्छे समय में सब दोस्त होते हैं, लेकिन बुरे समय में खुद पर भरोसा करना ही सबसे सही है।
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कहानी का नैतिक यह है कि आत्मनिर्भरता ही असली मित्र है और अंधा विश्वास नहीं करना चाहिए। हमें अपनी सुरक्षा की डोर खुद के हाथ में रखनी चाहिए।
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यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि दुनिया बुरी नहीं है, लेकिन हर कोई पहले अपना भला सोचता है,
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इसलिए हमें खुद को मजबूत बनाना चाहिए।
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