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कहानी का मुख्य पात्र कबीर, जो मुंबई में रहता है, महंगे गैजेट्स और स्टाइलिश चीज़ों का शौकीन है। उसकी लालच की प्रवृत्ति उसे मुसीबत में डाल देती है।
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पार्क में जॉगिंग करते वक्त कबीर को एक कीमती रोलेक्स घड़ी मिलती है। उसके मन में ईमानदारी और लालच की दो आवाजें गूंजती हैं, लेकिन वह लालच के वश में आकर घड़ी अपने पास रख लेता है।
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घड़ी को चुराने के बाद कबीर बेचैन हो जाता है। उसे नींद नहीं आती और हमेशा डर सताता रहता है कि पुलिस या उसके माता-पिता को घड़ी के बारे में पता चल जाएगा।
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कबीर को एक डरावना सपना आता है जिसमें लालच का पिशाच उसे सोने की जंजीरों से जकड़ लेता है। उसे महसूस होता है कि लालच उसकी खुशी और शांति छीन रहा है।
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सपने के बाद कबीर को अपनी गलती का एहसास होता है और वह घड़ी को सोसाइटी के सेक्रेटरी को लौटा देता है। सेक्रेटरी, जो उस घड़ी को अपना पारिवारिक धरोहर मानते थे, कबीर की ईमानदारी की सराहना करते हैं।
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कबीर को अपनी गलती सुधारने के बाद सच्ची खुशी मिलती है। उसे समझ आता है
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कि ईमानदारी से मिली शांति और खुशी किसी भी महंगी वस्तु से अधिक मूल्यवान है।
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कहानी का नैतिक संदेश है कि लालच मानसिक शांति का दुश्मन होता है और ईमानदारी में सच्चा सुकून मिलता है।
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यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि गलती को सुधारना महानता की निशानी है,
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जैसा कबीर ने अपनी गलती सुधार कर दिखाया।
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