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यह कहानी सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव की है, जो एक असली सुपरहीरो थे और उनकी बहादुरी आसमान से भी ऊँची थी।
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योगेंद्र का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के एक छोटे से गाँव में हुआ था।
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उनके पिता भी फौज में थे, जिससे उनका मन देश की सेवा करने का था।
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केवल 16 साल की उम्र में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने साहस का परिचय दिया।
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1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, उन्हें टाइगर हिल की चोटी को दुश्मन से आजाद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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दुश्मनों के हमले में उन्हें 15 गोलियाँ लगीं और उनका एक हाथ बुरी तरह टूट गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
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गंभीर चोटों के बावजूद, उन्होंने दुश्मन के बंकर तक पहुँचकर ग्रेनेड फेंककर अपनी टीम को प्रेरित किया और टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया।
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योगेंद्र सिंह यादव को उनकी अद्भुत वीरता के लिए भारत का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान 'परमवीर चक्र' दिया गया, और वह सबसे कम उम्र के विजेता बने।
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इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परिस्थितियाँ कठिन हों तो भी पक्का इरादा हमें जीत दिला सकता है, और देश प्रेम सबसे ऊपर होता है।
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यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि असली हीरो वह होता है जो मुश्किल समय में देश और अपनों के लिए खड़ा रहता है।
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